महकते थे कभी हम भी गुलाब की तरह !
सीनातान अकड़ते थे किसी नवाब की तरह !!
सब की नजरों में कल बन बैठे थे सवाल !
पेश आए है आज हम यूँ जवाब की तरह !!
दो-दिलो में बंद पडी थी अपनी प्रेम कहानी !
फड़फड़ा रही जो आज यूँ किताब की तरह !!
उम्र का इसे तकाजा कहे या दिल का कुसुर !
प्यार का छाया नशा जिस्म में शराब की तरह !!
दिल की अरमान बह न जाये आँसू बनके !
संजाये हैं जिसे पलको में ख्वाब की तरह !!
जब से बना जमाना दुश्मन अपने प्यार का !
तब से जल रहे दो -दिल तेजाब की तरह !!
दिल से ये दिल की लगी है यारों नही दिल्लगी !
उमड़ पड़ा है प्यार जो कफ-ए -सैलार की तरह !!
Wednesday, June 16, 2010
Saturday, June 12, 2010
35.नाम लिखा !
प्यार करना मै ने तुमसे सीखा !
इस दिल पे तुम्हारा ही नाम लिखा !!
भूल गया प्यार मे मैं सब कुछ !
किस से कहूँ मुझको रास्ता दिखा !!
इस कदर छाया दीवानापन कि !
फिर रहा हूँ मैं पागल सरीखा !!
पहले तो मैं डर गया था ऐसे !
देखकर तुम्हारा तेवर तीखा !!
गहराने लगा है प्यार हमारा !
प्यार का रगं हो न पाये कभी फिका !!
इस दिल पे तुम्हारा ही नाम लिखा !!
भूल गया प्यार मे मैं सब कुछ !
किस से कहूँ मुझको रास्ता दिखा !!
इस कदर छाया दीवानापन कि !
फिर रहा हूँ मैं पागल सरीखा !!
पहले तो मैं डर गया था ऐसे !
देखकर तुम्हारा तेवर तीखा !!
गहराने लगा है प्यार हमारा !
प्यार का रगं हो न पाये कभी फिका !!
34.तमन्ना जगी है
जब से मेरा दिल उन में लगी है !
जीने की मन में इक तमन्ना जगी है !!
वो भी तडप रही मैं भी तडप रहा !
दोनों दिल में आग बराबर लगी है !!
मैं ने किया मेरा जीवन उनके नाम !
अब तो वो जाने वफा मेरी जिन्दगी है !!
दिल दिया मैने पहली बार किसी को !
दिल्लगी नहीं यह तो दिल की लगी है !!
कल तक थी जो मेरे लिये ‘अजनबी ’!
आज ऐसा लगता वो मेरी सगी है !!
जीने की मन में इक तमन्ना जगी है !!
वो भी तडप रही मैं भी तडप रहा !
दोनों दिल में आग बराबर लगी है !!
मैं ने किया मेरा जीवन उनके नाम !
अब तो वो जाने वफा मेरी जिन्दगी है !!
दिल दिया मैने पहली बार किसी को !
दिल्लगी नहीं यह तो दिल की लगी है !!
कल तक थी जो मेरे लिये ‘अजनबी ’!
आज ऐसा लगता वो मेरी सगी है !!
33.गुलाब चाहिए !
कैसे कहूँ अपने मुँह से ‘‘जनाब चाहिए’’ !
नहीं नहीं हड्डी नही सिर्फ कबाब चाहिए !!
जीवन में मुझे मिले काँटे बहुत है !
अब मुझे एक गुलाब चाहिये !!
आँखों से आँसू मैने बहाये बहुत है !
निगाहों को अब हसीं ख्वाब चाहिये !!
उनसे तो किये मै ने कोई सवाल !
सभी सवालो का एक जवाब चाहिये !!
यूँ तो पढ़ने को करता मेरा मन !
सघ प्रकाशित कोई किताब चाहिये !!
भूलाने वास्ते मुझे दिल के गमों को !
ज्यादा नहीं बस दो-बुँद शराब चाहिये !!
जिसे पाकर संवर जाये मेरी जिन्दगानी !
ऐसी इक हमसफर लाजवाब चाहिये !!
नहीं नहीं हड्डी नही सिर्फ कबाब चाहिए !!
जीवन में मुझे मिले काँटे बहुत है !
अब मुझे एक गुलाब चाहिये !!
आँखों से आँसू मैने बहाये बहुत है !
निगाहों को अब हसीं ख्वाब चाहिये !!
उनसे तो किये मै ने कोई सवाल !
सभी सवालो का एक जवाब चाहिये !!
यूँ तो पढ़ने को करता मेरा मन !
सघ प्रकाशित कोई किताब चाहिये !!
भूलाने वास्ते मुझे दिल के गमों को !
ज्यादा नहीं बस दो-बुँद शराब चाहिये !!
जिसे पाकर संवर जाये मेरी जिन्दगानी !
ऐसी इक हमसफर लाजवाब चाहिये !!
32.जुदाई की काली घटायें !
यकीनन उन्हें मेरी याद आई होगी जरूर !
जब आई होगी याद तो सताई होगी जरूर !!
नजर मिलते ही शर्म से जो यूँ सिमट जाती !
खयालों में भी खोके वो शरमाई होगी जरूर !!
हिचकियाँ आ रही हैं क्यों फड़क रही है नजर !
मेरे बारे किसी को कुछ बताई होगी जरूर !!
तस्वीर मेरी ले गई है देके अपनी तस्वीर !
अपनी सहेलियों को तो दिखाई होगी जरूर !!
छेड़ छाड़ कर उन्हें जब पूछेंगी सहेलियाँ !
कुछ तो बहाना बह बनाई होगी जरूर !!
नैनों में नीद है न चैन दिल को लेटे है बस !
करवटों में वो भी रात बिताई होगी जरूर !!
डाकिये की हर आहट से दिल यूँ मचलता !
जैसे नाम मेरे उनकी चिट्टी आई होगी जरूर !!
तरस रही है निगाहें उन्हें देखने इक झलक !
मेरी राह में वो भी आँखें बिछाई होगी जरूर !!
धरती और आसमां के दीदार नहीं हो रहे !
जुदाई की काली घटाएं छाई होगी जरूर !!
पुरवाई से पूछूँया नभ के काले बादल से !
किसी के हाथों कुछ तो खबर भिजवाई होगी जरूर !!
उठ रहा मन में आज फिर से यौवन ज्वार !
बीते बरस की यादों से नहायी होगी जरूर !!
स्वाति बूँदों से बह रहे हैं अश्क आँखों से मेरे !
मेरी याद में वो भी आँसू बहायी होगी जरूर !!
आज ही के दिन मिले थे हम दोनों जहाँ में !
बीते बरस की यादों से नहायी होगी जरूर !!
देख बिजुरी छिप जाती जो मेरे सीने में आके !
बादल गरज सुन शोर मचाई होगी जरूर !!
मचल रहा है दिल क्यूं सपनें हिलोरें ले रहे !
कुछ तो घड़ियों खुशियों की आई होगी जरूर !!
बहुत दिनों के बाद मिले हैं फिर भी वो चुप है !
पहले न बोलने की कसम खाई होगी जरूर !!
उम्मीद तो है उनपे ऐतबार भी ‘अजनबी’ !
आँखों से दूर होके भी वफा निभायी होगी जरूर !!
ये तो अपनी सोच है प्यार का भरम भी !
‘गर ऐसा न हुआ तो वो हरजाई होगी जरुर !!
जब आई होगी याद तो सताई होगी जरूर !!
नजर मिलते ही शर्म से जो यूँ सिमट जाती !
खयालों में भी खोके वो शरमाई होगी जरूर !!
हिचकियाँ आ रही हैं क्यों फड़क रही है नजर !
मेरे बारे किसी को कुछ बताई होगी जरूर !!
तस्वीर मेरी ले गई है देके अपनी तस्वीर !
अपनी सहेलियों को तो दिखाई होगी जरूर !!
छेड़ छाड़ कर उन्हें जब पूछेंगी सहेलियाँ !
कुछ तो बहाना बह बनाई होगी जरूर !!
नैनों में नीद है न चैन दिल को लेटे है बस !
करवटों में वो भी रात बिताई होगी जरूर !!
डाकिये की हर आहट से दिल यूँ मचलता !
जैसे नाम मेरे उनकी चिट्टी आई होगी जरूर !!
तरस रही है निगाहें उन्हें देखने इक झलक !
मेरी राह में वो भी आँखें बिछाई होगी जरूर !!
धरती और आसमां के दीदार नहीं हो रहे !
जुदाई की काली घटाएं छाई होगी जरूर !!
पुरवाई से पूछूँया नभ के काले बादल से !
किसी के हाथों कुछ तो खबर भिजवाई होगी जरूर !!
उठ रहा मन में आज फिर से यौवन ज्वार !
बीते बरस की यादों से नहायी होगी जरूर !!
स्वाति बूँदों से बह रहे हैं अश्क आँखों से मेरे !
मेरी याद में वो भी आँसू बहायी होगी जरूर !!
आज ही के दिन मिले थे हम दोनों जहाँ में !
बीते बरस की यादों से नहायी होगी जरूर !!
देख बिजुरी छिप जाती जो मेरे सीने में आके !
बादल गरज सुन शोर मचाई होगी जरूर !!
मचल रहा है दिल क्यूं सपनें हिलोरें ले रहे !
कुछ तो घड़ियों खुशियों की आई होगी जरूर !!
बहुत दिनों के बाद मिले हैं फिर भी वो चुप है !
पहले न बोलने की कसम खाई होगी जरूर !!
उम्मीद तो है उनपे ऐतबार भी ‘अजनबी’ !
आँखों से दूर होके भी वफा निभायी होगी जरूर !!
ये तो अपनी सोच है प्यार का भरम भी !
‘गर ऐसा न हुआ तो वो हरजाई होगी जरुर !!
31.प्रतीक्षा में प्रियतम की !
सावन के नभ देश में, काली घटा लहराई है !
हरी भरी धरित्री पर, बन वर्षा वधू आई है !!
है हर्षित चातक चतुर
चकोर चकोरी भयभीत,
नृत्यरत तन्मय मोर है
गाये शुक-पिक नवगीत,
अधर अधीर है आज, तरूलता तरूणाई है !
मिट्टी की सौंधी मीठी महक
पँछी-सा चित्त उठा चहक,
देख हरियाली चहुँ ओर
तरूण-मन उठा दहक,
मन मचल रहा आज, चली हवा पुरवाई है !
आ रहा याद बीता सावन
संग दोनों थे ‘राधा किशन ’
आज जुदाई के आलम में
सीहर से उठते तन मन,
झींगुर की तान सुहानी, लगती ज्यों शहनाई है !
पल पल अमल सजल
उमंग जगाती स्वाती बूँद
विरह बेला में विरहिणी
लेती विवश हो आँखें मूँद,
यादों में प्रियतम की क्यों, आँखें आज भर आई है !
हे पावस की पावन-पवन
संग ले जाओ यह सन्देश ,
लौटे नहीं हैं अब तक क्यों
गये पिया जो हैं परदेश ,
देखो तन बदन में यूँ, आई कैसी अंगड़ाई है !
मुरझाया है मन-सुमन
शुष्क अधर उदास नैन,
चन्दन-सा है कया कंचन
विरह विषधर बेचैन,
मुक्त केश उन्मुक्त वेष में, बैठी आस लगाई है !
है प्रतीक्षा में प्रियतम की
निर्निमेष नयन सनीर,
तीर सम उर चीर कर
बह रहा सुधीर समीर,
देख ‘अजनबी’ को एक, आँखें पुनः धोखा खाई है !
हरी भरी धरित्री पर, बन वर्षा वधू आई है !!
है हर्षित चातक चतुर
चकोर चकोरी भयभीत,
नृत्यरत तन्मय मोर है
गाये शुक-पिक नवगीत,
अधर अधीर है आज, तरूलता तरूणाई है !
मिट्टी की सौंधी मीठी महक
पँछी-सा चित्त उठा चहक,
देख हरियाली चहुँ ओर
तरूण-मन उठा दहक,
मन मचल रहा आज, चली हवा पुरवाई है !
आ रहा याद बीता सावन
संग दोनों थे ‘राधा किशन ’
आज जुदाई के आलम में
सीहर से उठते तन मन,
झींगुर की तान सुहानी, लगती ज्यों शहनाई है !
पल पल अमल सजल
उमंग जगाती स्वाती बूँद
विरह बेला में विरहिणी
लेती विवश हो आँखें मूँद,
यादों में प्रियतम की क्यों, आँखें आज भर आई है !
हे पावस की पावन-पवन
संग ले जाओ यह सन्देश ,
लौटे नहीं हैं अब तक क्यों
गये पिया जो हैं परदेश ,
देखो तन बदन में यूँ, आई कैसी अंगड़ाई है !
मुरझाया है मन-सुमन
शुष्क अधर उदास नैन,
चन्दन-सा है कया कंचन
विरह विषधर बेचैन,
मुक्त केश उन्मुक्त वेष में, बैठी आस लगाई है !
है प्रतीक्षा में प्रियतम की
निर्निमेष नयन सनीर,
तीर सम उर चीर कर
बह रहा सुधीर समीर,
देख ‘अजनबी’ को एक, आँखें पुनः धोखा खाई है !
30.कश्मीर में सनम !
क्या लिखा है रबने हमारी तकदीर में सनम !
क्या-क्या लिखा है हमारे हाथों की लकीर में सनम !!
लैला-मजनू, शीरी-फरहाद, रोमियो-जुलियेट !
क्या नाम हमारे भी जुड़ेंगे रांझा व हीर में सनम !!
प्यार के रंग में तो रंग चुके है कब से दोनों !
आओ रंग जायें होली के रंग-अबीर में सनम !!
हमारे मिलने से देखो कैसे आई बहार फिजां में !
काश , इस वक्त होते दोनों कश्मीर में सनम !!
वो देखो अमराई में कब से कूक रही कोयल !
महक रहा महुआ मलयज समीर में समन !!
बड़ी फूर्सत से बनाया है ऊपर वाले ने तुम्हें !
कितनी खूब सूरत लग रही हो तस्वीर में सनम !!
स्वप्निल निगाहें तुम्हारी लगती झील-सी मुझको !
बांधलो मुझे रेशमी जुल्फों की जंजीर में सनम !!
तुम्हारी मांग आज मैं अपने खून से भर दूँगा !
चलो तुम्हें ले चलूँ देवी माँ के मंदिर में सनम !!
क्या मेरे संग तुम रह लोगी रूखी-सूखी खाकर !
जिन्दगी तुम्हारी तो बीती है पालक-पनीर खाकर !!
सच्चा प्यार तो होता हमेशा दिल से कहते लोग !
क्या रखा है पैसों के गरीब व अमीर में सनम !!
माना कि हमारे पास नहीं राजमहल का सुख !
प्यार हो तो मिलता चैन पर्ण-कुटीर में सनम !!
आओ प्यार करके दिखा दें दुनिया को हम दोनों !
क्या रखा है आखिर इस नश्वर शरीर में सनम !!
मेरे दिल में तुम होगी और तुम्हारे दिल में मैं !
प्रीत-अनुराग-अभिलाषा होगी पीर में सनम !!
याद है तुम्हें वो हसीं पल जब हुआ घायल मैं !
प्यार का छुपा था पैगाम नजरों के तीर में सनम !!
खून से लिखूँगा मैं अपनी मोहब्बत की दास्तांन !
ऐतबार है मुझे यूँ अपने जमीर में सनम !!
तुम्हें लेकर ही बुने सपने सजाया गुलिस्तां है !
देखे ख्वाब हैं हमेशा ख्वाबों की ताबीर में सनम !!
तुम्हारे गमों के आँसुओं को मैं पी लूँगा ‘अजनबी’ !
देखो कितना है दर्द छिपा आँखों के नीर में सनम !!
अपनी भावनाओं को तो शब्दों में पिरोऊँगा ही मैं !
शामिल नहीं हूँ शायर ‘गालिब-मीर’ में सनम !!
क्या-क्या लिखा है हमारे हाथों की लकीर में सनम !!
लैला-मजनू, शीरी-फरहाद, रोमियो-जुलियेट !
क्या नाम हमारे भी जुड़ेंगे रांझा व हीर में सनम !!
प्यार के रंग में तो रंग चुके है कब से दोनों !
आओ रंग जायें होली के रंग-अबीर में सनम !!
हमारे मिलने से देखो कैसे आई बहार फिजां में !
काश , इस वक्त होते दोनों कश्मीर में सनम !!
वो देखो अमराई में कब से कूक रही कोयल !
महक रहा महुआ मलयज समीर में समन !!
बड़ी फूर्सत से बनाया है ऊपर वाले ने तुम्हें !
कितनी खूब सूरत लग रही हो तस्वीर में सनम !!
स्वप्निल निगाहें तुम्हारी लगती झील-सी मुझको !
बांधलो मुझे रेशमी जुल्फों की जंजीर में सनम !!
तुम्हारी मांग आज मैं अपने खून से भर दूँगा !
चलो तुम्हें ले चलूँ देवी माँ के मंदिर में सनम !!
क्या मेरे संग तुम रह लोगी रूखी-सूखी खाकर !
जिन्दगी तुम्हारी तो बीती है पालक-पनीर खाकर !!
सच्चा प्यार तो होता हमेशा दिल से कहते लोग !
क्या रखा है पैसों के गरीब व अमीर में सनम !!
माना कि हमारे पास नहीं राजमहल का सुख !
प्यार हो तो मिलता चैन पर्ण-कुटीर में सनम !!
आओ प्यार करके दिखा दें दुनिया को हम दोनों !
क्या रखा है आखिर इस नश्वर शरीर में सनम !!
मेरे दिल में तुम होगी और तुम्हारे दिल में मैं !
प्रीत-अनुराग-अभिलाषा होगी पीर में सनम !!
याद है तुम्हें वो हसीं पल जब हुआ घायल मैं !
प्यार का छुपा था पैगाम नजरों के तीर में सनम !!
खून से लिखूँगा मैं अपनी मोहब्बत की दास्तांन !
ऐतबार है मुझे यूँ अपने जमीर में सनम !!
तुम्हें लेकर ही बुने सपने सजाया गुलिस्तां है !
देखे ख्वाब हैं हमेशा ख्वाबों की ताबीर में सनम !!
तुम्हारे गमों के आँसुओं को मैं पी लूँगा ‘अजनबी’ !
देखो कितना है दर्द छिपा आँखों के नीर में सनम !!
अपनी भावनाओं को तो शब्दों में पिरोऊँगा ही मैं !
शामिल नहीं हूँ शायर ‘गालिब-मीर’ में सनम !!
29.जूही की कली है तुम्हारी याद !
जूही की कली है तुम्हारी याद !
रेशम -सी मखमली है तुम्हारी याद !!
मधु-सा मधुर लगता प्रेम तुम्हार !
मिश्री की डली है तुम्हारी याद !!
रात दिन मेरा ख्याल रखती !
कितनी भली है तुम्हारी याद !!
खयाल बन उड़ आती मन बगिया में !
जैसे कोई तितली है तुम्हारी याद !!
कभी इस डाली कभी उस डाली !
खूब मनचली है तुम्हारी याद !!
तरसती आँखें तड़पता दिल !
मचाती खलबली है तुम्हारी याद !!
सोने से पहले जागने के बाद !
फिर निकल चली है तुम्हारी याद !!
भूख मिटाने मेरी आ जाती देखो !
दोसा व इड़ली है तुम्हारी याद !!
सारी दुनिया की मुझे सैर कराती !
लंदन, पैरिस, ईटली है तुम्हारी याद !!
खाने में भी मजा है और चूसने में भी !
आम की गुठली है तुम्हारी याद !!
जी तो चाहता जी भर के बजाता रहूँ !
जैसे कोई डपली है तुम्हारी याद !!
प्यार में मुझको पागल क्यों बना रही !
क्या प्यार में पगली है तुम्हारी याद !!
दिखने में सुन्दर छूने में कोमल !
सोने की मछली है तुम्हारी याद !!
सपनों में केवल तम्हीं तुम दिखती !
कितनी असली है तुम्हारी याद !!
‘राधा किशन ’ की प्रेम कहानी !
बनाने चली है तुम्हारी याद !!
जिन्दगी भर तो ढोना है यूँ ‘अजनबी’ !
जीवन की पोटली है तुम्हारी याद !!
ज्योति-सी जगमगाती जीवन को !
बन गयी दीपावली है तुम्हारी याद !!
जुदाई तन्हाई में गुनगुनी लगती !
धूप-सी उजली है तुम्हारी याद !!
रेशम -सी मखमली है तुम्हारी याद !!
मधु-सा मधुर लगता प्रेम तुम्हार !
मिश्री की डली है तुम्हारी याद !!
रात दिन मेरा ख्याल रखती !
कितनी भली है तुम्हारी याद !!
खयाल बन उड़ आती मन बगिया में !
जैसे कोई तितली है तुम्हारी याद !!
कभी इस डाली कभी उस डाली !
खूब मनचली है तुम्हारी याद !!
तरसती आँखें तड़पता दिल !
मचाती खलबली है तुम्हारी याद !!
सोने से पहले जागने के बाद !
फिर निकल चली है तुम्हारी याद !!
भूख मिटाने मेरी आ जाती देखो !
दोसा व इड़ली है तुम्हारी याद !!
सारी दुनिया की मुझे सैर कराती !
लंदन, पैरिस, ईटली है तुम्हारी याद !!
खाने में भी मजा है और चूसने में भी !
आम की गुठली है तुम्हारी याद !!
जी तो चाहता जी भर के बजाता रहूँ !
जैसे कोई डपली है तुम्हारी याद !!
प्यार में मुझको पागल क्यों बना रही !
क्या प्यार में पगली है तुम्हारी याद !!
दिखने में सुन्दर छूने में कोमल !
सोने की मछली है तुम्हारी याद !!
सपनों में केवल तम्हीं तुम दिखती !
कितनी असली है तुम्हारी याद !!
‘राधा किशन ’ की प्रेम कहानी !
बनाने चली है तुम्हारी याद !!
जिन्दगी भर तो ढोना है यूँ ‘अजनबी’ !
जीवन की पोटली है तुम्हारी याद !!
ज्योति-सी जगमगाती जीवन को !
बन गयी दीपावली है तुम्हारी याद !!
जुदाई तन्हाई में गुनगुनी लगती !
धूप-सी उजली है तुम्हारी याद !!
28.मेंहदी से !
अपने हाथों पर मेंहदी से उन्होंने लिखा है मेरा नाम !
डर हैं हम दोनों हो न जायें पूरे कॉलेज में बदनाम !!
वैसे भी हमारे प्यार का पता चल चुका है दोस्तों का !
क्या हम ‘राधा-किशन’ दोनों झेल भी पायेंगे यह इल्जाम !!
डर हैं हम दोनों हो न जायें पूरे कॉलेज में बदनाम !!
वैसे भी हमारे प्यार का पता चल चुका है दोस्तों का !
क्या हम ‘राधा-किशन’ दोनों झेल भी पायेंगे यह इल्जाम !!
27.जरूरत है !
मेरे हृदय में तुम्हारी मुहब्बत की मूरत है !
मेरे खयालों में तुम्हारी मासूम -सी सूरत है !!
आज कह रहा हूँ मैं, दुनियावालों के सामने !
मुझे तुम्हारी और सिर्फ तुम्हारी जरूरत है !!
मेरे खयालों में तुम्हारी मासूम -सी सूरत है !!
आज कह रहा हूँ मैं, दुनियावालों के सामने !
मुझे तुम्हारी और सिर्फ तुम्हारी जरूरत है !!
26.शम्मा में !
अगर मानो होती न मुहब्बत जहाँ में !
जीते ये लोग कैसे किस तमन्ना में !!
दीवानों की हालत क्या बतायें ‘अजनबी’ !
परवानों से पूछो क्यों मर मिटते शम्मा में !!
जीते ये लोग कैसे किस तमन्ना में !!
दीवानों की हालत क्या बतायें ‘अजनबी’ !
परवानों से पूछो क्यों मर मिटते शम्मा में !!
25.आदत - सी हो गई !
ख्यालों में खोने की आदत-सी हो गई !
सपने संजोने की आदत-सी हो गई !!
पलके भीगोने की आदत-सी हो गई !
यादों में यूँ रोने की आदत-सी हो गई !!
सपने संजोने की आदत-सी हो गई !!
पलके भीगोने की आदत-सी हो गई !
यादों में यूँ रोने की आदत-सी हो गई !!
24.इकरार !
दिल में वफा के दिये जल रहे हैं !
याद में उनकी ख्वाब पल रहे हैं !!
प्यार का जब से इकरार हुआ है !
मस्ती में मस्त मन मचल रहे हैं !!
याद में उनकी ख्वाब पल रहे हैं !!
प्यार का जब से इकरार हुआ है !
मस्ती में मस्त मन मचल रहे हैं !!
23.संवार दो !
दिल के बदले दिल अपना उधार दो समन !
अपनी फूटी किस्मत को तुम सवांर दो समन !!
अर्सो से आरजू है किसी की मुहब्बत हो मुअस्सर !
प्यास बुझे मेरे दिल की ऐसा प्यार दो सनम !!
अपनी फूटी किस्मत को तुम सवांर दो समन !!
अर्सो से आरजू है किसी की मुहब्बत हो मुअस्सर !
प्यास बुझे मेरे दिल की ऐसा प्यार दो सनम !!
22.काश !
चलो कोई तो है इस जहाँ में अपनी भी चाहने वाली !
सुख व दुःख में पल भर के दो-बूँद आँसू बहाने वाली !!
खुदा ऐ काश ! वो हो जाती मेरी हमेशा की जीवन साथी !
जनम-जनम तक प्यार और वफा निभाने वाली !!
सुख व दुःख में पल भर के दो-बूँद आँसू बहाने वाली !!
खुदा ऐ काश ! वो हो जाती मेरी हमेशा की जीवन साथी !
जनम-जनम तक प्यार और वफा निभाने वाली !!
21.कभी - कभी !
पहले कभी इतनी हसीं न थी मेरी जिन्दगी !
जब से तुम्हें देखा मैंने जीना सिखा ‘अजनबी’ !!
तमन्ना मेरी तुम्हें पाने की यूँ होने लगी हैं जवां !
तुम तो मेरे अपने ही हो ऐसा लगता कभी - कभी!!
जब से तुम्हें देखा मैंने जीना सिखा ‘अजनबी’ !!
तमन्ना मेरी तुम्हें पाने की यूँ होने लगी हैं जवां !
तुम तो मेरे अपने ही हो ऐसा लगता कभी - कभी!!
तेरे दिल में बंद हूँ मैं, निगाहों को पसंद हूँ मैं !
एहसान तुम्हारा , एहसानमंद हूँ मैं !!
तेरा हबीब हूँ मैं, दिल के करीब हूँ मैं !
मुझे मिला प्यार तुम्हारा बड़ा खुशनसीब हूँ मैं !!
तेरे मन का मीत हूँ मैं, तेरे दिल के करीब हूँ मैं !
गुनगुना लो हमें भी, दर्दीला संगीत हूँ मैं !!
हर ख़ुशी है तू गम हूँ मैं, कागज तू कलम हूँ मैं !
हर कसम है तुम्हारी, तेरा ही सनम हूँ मैं !!
तू कली भौंरा हूँ मैं, तुलसी तू चौंरा हूँ मैं !
श्री गणेश करें प्यार का, तू गौरी गौरा हूँ मैं !!
तू फूल खुशबू हूं मैं, तेरी जुस्तजू हूँ मैं !
तेरी आरजू है हमारी, तेरी आरजू हूँ मैं !!
‘राधा’ तू ‘किशन' हूँ मैं, सजनी तू साजन हूँ मैं !
सांसों में बसी तुम हो, तेरे दिल की धड़कन हूँ मैं !!
तू नैया तो झील हूँ मैं, राहें तू मंजिल हूँ मैं !
शुक्रिया है जो तुम्हारा, समझा इस काबिल हूँ मैं !!
एहसान तुम्हारा , एहसानमंद हूँ मैं !!
तेरा हबीब हूँ मैं, दिल के करीब हूँ मैं !
मुझे मिला प्यार तुम्हारा बड़ा खुशनसीब हूँ मैं !!
तेरे मन का मीत हूँ मैं, तेरे दिल के करीब हूँ मैं !
गुनगुना लो हमें भी, दर्दीला संगीत हूँ मैं !!
हर ख़ुशी है तू गम हूँ मैं, कागज तू कलम हूँ मैं !
हर कसम है तुम्हारी, तेरा ही सनम हूँ मैं !!
तू कली भौंरा हूँ मैं, तुलसी तू चौंरा हूँ मैं !
श्री गणेश करें प्यार का, तू गौरी गौरा हूँ मैं !!
तू फूल खुशबू हूं मैं, तेरी जुस्तजू हूँ मैं !
तेरी आरजू है हमारी, तेरी आरजू हूँ मैं !!
‘राधा’ तू ‘किशन' हूँ मैं, सजनी तू साजन हूँ मैं !
सांसों में बसी तुम हो, तेरे दिल की धड़कन हूँ मैं !!
तू नैया तो झील हूँ मैं, राहें तू मंजिल हूँ मैं !
शुक्रिया है जो तुम्हारा, समझा इस काबिल हूँ मैं !!
20. शुक्रिया !
तेरे दिल में बंद हूँ मैं, निगाहों को पसंद हूँ मैं !
एहसान है तुम्हार, एहसानमंद हूँ मैं !!
तेरा हबीब हूँ मैं, दिल के करीब हूँ मैं !
मुझे प्यार मिला तुम्हार बड़ा खुषनसीब हूँ मैं !!
तेरे मन का मीत हूँ मैं, तेरे दिल के करीब हूँ मैं !
गुनगुना लो हमें भी, दर्दीला संगीत हूँ मैं !!
हर खुषी है तू गम हूँ मैं, कागज तू कलम हूँ मैं !
हर कसम है तुम्हारी, तेरा ही सनम हूँ मैं !!
तू कली भौंरा हूँ मैं, तुलसी तू चौंरा हूँ मैं !
श्री गणेष करें प्यार का, तू गौरी गौरा हूँ मैं !!
तू फूल खुषबू हूं मैं, तेरी जुस्तजू हूँ मैं !
तेरी आरजू है हमारी, तेरी आरजू हूँ मैं !!
‘राधा’ तू ‘किषन’ हूँ मैं, सजनी तू साजन हूँ मैं !
सांसों में बसी तुम हो, तेरे दिल की धड़कन हूँ मैं !!
तू नैया तो झील हूँ मैं, राहें तू मंजिल हूँ मैं !
शुक्रिया है जो तुम्हारा, समझा इस काबिल हूँ मैं !!
एहसान है तुम्हार, एहसानमंद हूँ मैं !!
तेरा हबीब हूँ मैं, दिल के करीब हूँ मैं !
मुझे प्यार मिला तुम्हार बड़ा खुषनसीब हूँ मैं !!
तेरे मन का मीत हूँ मैं, तेरे दिल के करीब हूँ मैं !
गुनगुना लो हमें भी, दर्दीला संगीत हूँ मैं !!
हर खुषी है तू गम हूँ मैं, कागज तू कलम हूँ मैं !
हर कसम है तुम्हारी, तेरा ही सनम हूँ मैं !!
तू कली भौंरा हूँ मैं, तुलसी तू चौंरा हूँ मैं !
श्री गणेष करें प्यार का, तू गौरी गौरा हूँ मैं !!
तू फूल खुषबू हूं मैं, तेरी जुस्तजू हूँ मैं !
तेरी आरजू है हमारी, तेरी आरजू हूँ मैं !!
‘राधा’ तू ‘किषन’ हूँ मैं, सजनी तू साजन हूँ मैं !
सांसों में बसी तुम हो, तेरे दिल की धड़कन हूँ मैं !!
तू नैया तो झील हूँ मैं, राहें तू मंजिल हूँ मैं !
शुक्रिया है जो तुम्हारा, समझा इस काबिल हूँ मैं !!
19.गुलशन हो तुम !
मेरी चाहत का चमन हो तुम !
अरमानों का गुलषन हो तुम !!
मेरी नस-नस में बसे तुम हो !
मेरे दिल की धड़कन हो तुम !!
उपहार देने मुझे जन्मदिन पर !
मेरे लिये लाये कंगना हो तुम !!
तुमने मुझे जब राधा पूकारा !
तो मैंने कहा मेरे किशन हो तुम !!
मैं तुम्हारी दासी तुलसी हूँ पिया !
मेरी लिये तो नील गगन हो तुम !!
आओ बुझा दूँ मैं आज प्यास तुम्हारी !
बरखा हूँ मैं प्यासा-सावन हो तुम !!
खो गई हूँ तुम्हारी मुहब्बत में मैं !
जैसे मेरे प्यार में मगन हो तुम !!
आँखों में तुम्हारी देखूँ तस्वीर मेरी !
‘अजनबी’ ज्यों मेरा दर्पण हो तुम !!
अरमानों का गुलषन हो तुम !!
मेरी नस-नस में बसे तुम हो !
मेरे दिल की धड़कन हो तुम !!
उपहार देने मुझे जन्मदिन पर !
मेरे लिये लाये कंगना हो तुम !!
तुमने मुझे जब राधा पूकारा !
तो मैंने कहा मेरे किशन हो तुम !!
मैं तुम्हारी दासी तुलसी हूँ पिया !
मेरी लिये तो नील गगन हो तुम !!
आओ बुझा दूँ मैं आज प्यास तुम्हारी !
बरखा हूँ मैं प्यासा-सावन हो तुम !!
खो गई हूँ तुम्हारी मुहब्बत में मैं !
जैसे मेरे प्यार में मगन हो तुम !!
आँखों में तुम्हारी देखूँ तस्वीर मेरी !
‘अजनबी’ ज्यों मेरा दर्पण हो तुम !!
18. ख़ामोशी
जब जब ख़ामोशी मुझ को लीलने लगती !
उनकी यादों की कली यूँ खिलने लगती !!
सन्नाटे के उस आलम में चूपके-चूपके !
आकर ‘अजनबी’ से कोई मिलने लगती !!
उनकी यादों की कली यूँ खिलने लगती !!
सन्नाटे के उस आलम में चूपके-चूपके !
आकर ‘अजनबी’ से कोई मिलने लगती !!
17.दिलको करार आए !
देख लूँ जब तुझे मैं इक नजर
मेरे दिलको करार आए !
पास क्यों न हों लाखों हसीना
मुझको तुझपे ही प्यार आए !!
दिल में बसी है चाहत तुम्हारी,
प्यारी-सी लगती सूरत तुम्हारी,
चाहत तुम्हारी सूरत तुम्हारी,
याद अदायें शोख तुम्हारी,
जाने क्यों जानम बार बार आए !
देख लूँ जब तुझे मैं इक नजर
मेरे दिल को करार आए !!
कल तक थे हम दो अंजाने
आज बन हैं प्रेम दीवाने,
इक शम्मा और इक परवाने,
इश्क में होके गिरफ्तार आए,
देखलूँ जब तुझे मैं इक नजर,
मेरे दिल को करार आए !!
तुम जो मिली तो चाह मिली है,
भटके राही को राह मिली है,
चह मिली है राह मिली है,
मुझको मुहब्बत अथाह मिली है,
बिगड़े नसीब तुम सवांर लाए !
देख लूँ जब मैं तुझे इक नजर,
मेरे दिलको करार आए !!
प्यार के काबिल यूँ दिल मिला,
इक खूबसूरत साहिल मिला,
दिल भी मिला साहिल भी मिला,
प्यार का जब से चला सिलसिला,
भूले हम घर अपना तेरे द्वार आए,
देख लूँ जब मैं तुझें इक नजर,
मेरे दिल को करार आए !!
मेरे दिलको करार आए !
पास क्यों न हों लाखों हसीना
मुझको तुझपे ही प्यार आए !!
दिल में बसी है चाहत तुम्हारी,
प्यारी-सी लगती सूरत तुम्हारी,
चाहत तुम्हारी सूरत तुम्हारी,
याद अदायें शोख तुम्हारी,
जाने क्यों जानम बार बार आए !
देख लूँ जब तुझे मैं इक नजर
मेरे दिल को करार आए !!
कल तक थे हम दो अंजाने
आज बन हैं प्रेम दीवाने,
इक शम्मा और इक परवाने,
इश्क में होके गिरफ्तार आए,
देखलूँ जब तुझे मैं इक नजर,
मेरे दिल को करार आए !!
तुम जो मिली तो चाह मिली है,
भटके राही को राह मिली है,
चह मिली है राह मिली है,
मुझको मुहब्बत अथाह मिली है,
बिगड़े नसीब तुम सवांर लाए !
देख लूँ जब मैं तुझे इक नजर,
मेरे दिलको करार आए !!
प्यार के काबिल यूँ दिल मिला,
इक खूबसूरत साहिल मिला,
दिल भी मिला साहिल भी मिला,
प्यार का जब से चला सिलसिला,
भूले हम घर अपना तेरे द्वार आए,
देख लूँ जब मैं तुझें इक नजर,
मेरे दिल को करार आए !!
16. ऐतवार !
ऐतवार की सरहद को हम
लांघ चुके हैं शायद !
तभी तो पानी में परछाई देख कहते
वो आ रहा चाँद हमसे मिलने !!
लांघ चुके हैं शायद !
तभी तो पानी में परछाई देख कहते
वो आ रहा चाँद हमसे मिलने !!
15. अरमान पल रहे हैं !
अरमान पल रहे हैं, दो दिल मचल रहे हैं
प्यार की राह में बनके हमराही
बांहों में डाले बाहें एक साथ चल रहे हैं !
अरमान पल रहे हैं दो दिल मचल रहे हैं !!
इश्क की इस कदर जो लगी आग है,
इस आग में हम तुम दोनों जल रहे हैं, अरमान ........!
दिल में महफिल में, आँखों की झील में तुम ही तुम हो,
बाहों में निगाहों में राहों में तुम ही तुम हो,
जिसे दिल दिया वो तुम हो, जिसे प्यार किया वो तुम हो,
चाहा है तुम्हें दिल से और चाहते रहेंगें,
चाहत की हद से हम आगे निकल रहे हैं, अरमान ........!
डालों में सवालों में, खयालों में तुम ही तुम हो,
गुलाबों में जवाबों में, ख्वाबों में तुम ही तुम हो,
मेरे दिल का मेहमां हो, मेरे प्यार का आशियाँ हो,
जी रहे हैं प्यार में हम कभी मरके रहेंगे ,
चाहत के बहाने यूँ दो-दिल बहल रहे हैं, अरमान ........!
हवाओं में फिजाओं में, घटायों में तुम ही तुम हो,
बहारों में नजारों में, सितारों में तुम्हीं तुम हो,
तुमने हमे सवांरा है, तुमने हमें स्वीकारा है,
खाते है हम कसंम हम प्यार निभाते रहेंगे,
बदलेंगे हम कभी ना मौसम बदल रहे हैं, अरमान ........!
मन में धड़कन में, कणकण में तुम ही तुम हो,
वादों में इरादों में, यादों में तुम्हीं तुम हो,
तुमने हमे अपनाया है, हमें यूँ अपना बनाया है,
जलता है जमाना तो उसे और जलायेंगे,
देखिये जमाने के लोग हाथ मल रहे हैं, अरमान ........!
प्यार की राह में बनके हम राही
बांहों में डाले बाहें एक साथ चल रहे हैं !
अरमान पल रहें हैं, दो-दिल मचल रहे हैं !!
प्यार की राह में बनके हमराही
बांहों में डाले बाहें एक साथ चल रहे हैं !
अरमान पल रहे हैं दो दिल मचल रहे हैं !!
इश्क की इस कदर जो लगी आग है,
इस आग में हम तुम दोनों जल रहे हैं, अरमान ........!
दिल में महफिल में, आँखों की झील में तुम ही तुम हो,
बाहों में निगाहों में राहों में तुम ही तुम हो,
जिसे दिल दिया वो तुम हो, जिसे प्यार किया वो तुम हो,
चाहा है तुम्हें दिल से और चाहते रहेंगें,
चाहत की हद से हम आगे निकल रहे हैं, अरमान ........!
डालों में सवालों में, खयालों में तुम ही तुम हो,
गुलाबों में जवाबों में, ख्वाबों में तुम ही तुम हो,
मेरे दिल का मेहमां हो, मेरे प्यार का आशियाँ हो,
जी रहे हैं प्यार में हम कभी मरके रहेंगे ,
चाहत के बहाने यूँ दो-दिल बहल रहे हैं, अरमान ........!
हवाओं में फिजाओं में, घटायों में तुम ही तुम हो,
बहारों में नजारों में, सितारों में तुम्हीं तुम हो,
तुमने हमे सवांरा है, तुमने हमें स्वीकारा है,
खाते है हम कसंम हम प्यार निभाते रहेंगे,
बदलेंगे हम कभी ना मौसम बदल रहे हैं, अरमान ........!
मन में धड़कन में, कणकण में तुम ही तुम हो,
वादों में इरादों में, यादों में तुम्हीं तुम हो,
तुमने हमे अपनाया है, हमें यूँ अपना बनाया है,
जलता है जमाना तो उसे और जलायेंगे,
देखिये जमाने के लोग हाथ मल रहे हैं, अरमान ........!
प्यार की राह में बनके हम राही
बांहों में डाले बाहें एक साथ चल रहे हैं !
अरमान पल रहें हैं, दो-दिल मचल रहे हैं !!
14.लाजवाब है !
होंठ नहीं ये कली-ए-गुलाब है !
आँख नहीं ये प्याला-ए-शराब है !!
कैसे करूँ मैं तारीफ ‘अजनबी’ !
खूबसूरती उनकी लाजवाब है !!
आँख नहीं ये प्याला-ए-शराब है !!
कैसे करूँ मैं तारीफ ‘अजनबी’ !
खूबसूरती उनकी लाजवाब है !!
13.अच्छा लगता है !
उनकी यादों में खोना मुझको अच्छा लगता है !
बीज प्यार के बोना मुझको अच्छा लगता है !!
उनको बनाकर दिल की रानी ‘अजनबी’ !
यूँ सपने संजोना मुझको अच्छा लगता है !!
बीज प्यार के बोना मुझको अच्छा लगता है !!
उनको बनाकर दिल की रानी ‘अजनबी’ !
यूँ सपने संजोना मुझको अच्छा लगता है !!
12.आजकल !
यूँ उभर आई है हमारी खुशियाँ आजकल !
कि दब गई अपनी सारी खामियाँ आजकल !!
दिल बाग.बाग हुआ जा रहा प्यार में तुम्हारे !
यूं घर कर गई मन में खुशियाँ आजकल !!
कल तलक तो बेहद उदास थे ये दो नैन !
हसीन ख्वाबें देख रही वही अँखियाँ आजकल !!
सुब्हो.शाम रात.दिन बस तुम्हारा ही ख्याल !
डूबी यादों की चाशनी में खामोशियाँ आजकल !!
चाहत की खुशबू से यूं महका मन बगिया !
आशाओं की उड़ने लगी तितलियाँ आजकल !!
वर्षो से चाहत थी किसी की चाहत की दिल में !
किस्मत की हुई है मेहेरबानियाँ आजकल !!
चले हैं दो.दीवाने लेकर प्यार भरे दो.दिल !
प्यार का बनाने जहाँ में आशियां आजकल !!
प्यार के समन्दर को पार लगाने की खातिर !
ढील दी है हमने दिल की कश्तियाँ आजकल !!
है बेकरार दिल तुमसे मिलने को बेताब !
इस कदर बढ़ गई है बेखुदियाँ आजकल !!
गुनगुनाने लगे है होंठ जब से प्रेम गीत !
लेने लगी है जवानी अंगड़ाईयाँ आजकल !!
मुझे प्यार से सता रहे मेरे साथी सहचर !
तुम्हें भी तो चीढ़ा रही होंगी सखियाँ आजकल !!
गली.गली डगर.डगर बस हमारी चर्चा !
अपने प्यार की टंग गई तख्तियाँ आजकल !!
आँखें मेरी फड़क रही दिल भी तो मचल रहा !
रूक रूक के आने लगी हिचकियाँ आजकल !!
खनक रही है चुड़ियाँ पायल भी बज रहे !
कानों में यूँ गुंज रही शहनाईयाँ आजकल !!
लेखनी यूँ मचल रही हाशिये भी कम पड़े !
प्यार के रंग में रंग गई चिट्ठियाँ आजकल !!
लाल.गुलाब से सुन्दर चेहरे से तुम्हारे यूँ !
झर रही है मुस्कानों की पंखुड़ियाँ आजकल !!
जुल्फों की काली घटाओं में छिपा चाँद.सा मुखड़ा !
नजरों की चमक रही बिजलीयाँ आजकल !!
तुम्हारी यादों की सुनहरी झील में तो देखो !
आरजुओं की तैरती है मछलियाँ आजकल !!
डरते नहीं हैं हम जमाने से पर क्या करें !
दोनों की है कुछ.कुछ मजबूरियाँ आजकल !!
इतना ना तड़पाओ मुझे ऐ मेरी जाने वफा !
आँखों से अश्क के बह रहे मोतियाँ आजकल !!
कैसे बतायें हम दिल की बात तुम्हीं बताओ !
आँसुओं से लिख रहे है कहानियाँ आजकल !!
चाहत भरे दो-दिल की नीव पर ‘अजनबी’ !
बस रही है देखो प्यार की बस्तियाँ आजकल !!
यादों का है छाया मौसम दिलो दिमाग में ऐसा !
बार बार याद दिलाती यूँ निशानियाँ आजकल !!
मनमंदिर में मेरे जब से आ बसी हो तुम !
जीवन्त-सी लगती है तुम्हारी मूर्त्तियाँ आजकल !!
भूख लगती है न प्यास हमें तुम्हारे प्यार में !
इस कदर मन में छाई मस्तियाँ आजकल !!
प्रीत, की डोरी से बंध जब उड़ा मन-पतंग !
बौनी लगती आस्मां की ऊँचाईयाँ आजकल !!
प्यार की राहों में चलते-चलते हासिल !
हो रही यूँ नई नई अनुभूतियाँ आजकल !!
प्यार के रंग में रंग गए ‘राधा’ और ‘किशन ’ !
सखियाँ भी तो मना रही होलियाँ आजकल !!
शर्म के गुलाल से लाल हो रहे हैं दोनों गाल !
निगाहों की चल रही है पिचकारियाँ आजकल !!
आँखों से आँसू बहा समुन्दर बनाकर हम !
नाप रहे हैं प्यार की गहराईयाँ आजकल !!
तुम्हारे आने से बंजर में भी बहार आ गई !
बिन तुम्हारे सूनी लगती गलियाँ आजकल !!
होनें लगे है हम पूरे कॉलेज में यूँ बदनाम !
घूर घूर के देखते लड़के-लड़कियाँ आजकल !!
गुस्से का पारा मेरा आस्मां छू जाता जाने क्यों !
तुम्हें देख के जब कोई बजाता सीटियाँ आजकल !!
अपने प्यार का दुश्मन क्यों हुआ सारा जमाना !
आते जाते कस रहे सब फब्तियाँ आजकल !!
कि दब गई अपनी सारी खामियाँ आजकल !!
दिल बाग.बाग हुआ जा रहा प्यार में तुम्हारे !
यूं घर कर गई मन में खुशियाँ आजकल !!
कल तलक तो बेहद उदास थे ये दो नैन !
हसीन ख्वाबें देख रही वही अँखियाँ आजकल !!
सुब्हो.शाम रात.दिन बस तुम्हारा ही ख्याल !
डूबी यादों की चाशनी में खामोशियाँ आजकल !!
चाहत की खुशबू से यूं महका मन बगिया !
आशाओं की उड़ने लगी तितलियाँ आजकल !!
वर्षो से चाहत थी किसी की चाहत की दिल में !
किस्मत की हुई है मेहेरबानियाँ आजकल !!
चले हैं दो.दीवाने लेकर प्यार भरे दो.दिल !
प्यार का बनाने जहाँ में आशियां आजकल !!
प्यार के समन्दर को पार लगाने की खातिर !
ढील दी है हमने दिल की कश्तियाँ आजकल !!
है बेकरार दिल तुमसे मिलने को बेताब !
इस कदर बढ़ गई है बेखुदियाँ आजकल !!
गुनगुनाने लगे है होंठ जब से प्रेम गीत !
लेने लगी है जवानी अंगड़ाईयाँ आजकल !!
मुझे प्यार से सता रहे मेरे साथी सहचर !
तुम्हें भी तो चीढ़ा रही होंगी सखियाँ आजकल !!
गली.गली डगर.डगर बस हमारी चर्चा !
अपने प्यार की टंग गई तख्तियाँ आजकल !!
आँखें मेरी फड़क रही दिल भी तो मचल रहा !
रूक रूक के आने लगी हिचकियाँ आजकल !!
खनक रही है चुड़ियाँ पायल भी बज रहे !
कानों में यूँ गुंज रही शहनाईयाँ आजकल !!
लेखनी यूँ मचल रही हाशिये भी कम पड़े !
प्यार के रंग में रंग गई चिट्ठियाँ आजकल !!
लाल.गुलाब से सुन्दर चेहरे से तुम्हारे यूँ !
झर रही है मुस्कानों की पंखुड़ियाँ आजकल !!
जुल्फों की काली घटाओं में छिपा चाँद.सा मुखड़ा !
नजरों की चमक रही बिजलीयाँ आजकल !!
तुम्हारी यादों की सुनहरी झील में तो देखो !
आरजुओं की तैरती है मछलियाँ आजकल !!
डरते नहीं हैं हम जमाने से पर क्या करें !
दोनों की है कुछ.कुछ मजबूरियाँ आजकल !!
इतना ना तड़पाओ मुझे ऐ मेरी जाने वफा !
आँखों से अश्क के बह रहे मोतियाँ आजकल !!
कैसे बतायें हम दिल की बात तुम्हीं बताओ !
आँसुओं से लिख रहे है कहानियाँ आजकल !!
चाहत भरे दो-दिल की नीव पर ‘अजनबी’ !
बस रही है देखो प्यार की बस्तियाँ आजकल !!
यादों का है छाया मौसम दिलो दिमाग में ऐसा !
बार बार याद दिलाती यूँ निशानियाँ आजकल !!
मनमंदिर में मेरे जब से आ बसी हो तुम !
जीवन्त-सी लगती है तुम्हारी मूर्त्तियाँ आजकल !!
भूख लगती है न प्यास हमें तुम्हारे प्यार में !
इस कदर मन में छाई मस्तियाँ आजकल !!
प्रीत, की डोरी से बंध जब उड़ा मन-पतंग !
बौनी लगती आस्मां की ऊँचाईयाँ आजकल !!
प्यार की राहों में चलते-चलते हासिल !
हो रही यूँ नई नई अनुभूतियाँ आजकल !!
प्यार के रंग में रंग गए ‘राधा’ और ‘किशन ’ !
सखियाँ भी तो मना रही होलियाँ आजकल !!
शर्म के गुलाल से लाल हो रहे हैं दोनों गाल !
निगाहों की चल रही है पिचकारियाँ आजकल !!
आँखों से आँसू बहा समुन्दर बनाकर हम !
नाप रहे हैं प्यार की गहराईयाँ आजकल !!
तुम्हारे आने से बंजर में भी बहार आ गई !
बिन तुम्हारे सूनी लगती गलियाँ आजकल !!
होनें लगे है हम पूरे कॉलेज में यूँ बदनाम !
घूर घूर के देखते लड़के-लड़कियाँ आजकल !!
गुस्से का पारा मेरा आस्मां छू जाता जाने क्यों !
तुम्हें देख के जब कोई बजाता सीटियाँ आजकल !!
अपने प्यार का दुश्मन क्यों हुआ सारा जमाना !
आते जाते कस रहे सब फब्तियाँ आजकल !!
11.जब याद तुम्हारी याद आती है !
जब याद तुम्हारी आती है !
तो मुझको यूँ खूब सताती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
तो दिल को बड़ा तड़पाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
आँसुओं से आँखें भीग जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
नैनों से नींद उड़ जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
चाहत मेरी आँसू बहाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
साथ देती तुम्हारी पाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
मेरी छलनी हो जाती छाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
यादें ही दिलको बहलाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
तमन्नाएं नई जग जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
ख़ामोशी मेरी गीत गाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
वफा ही राहत दिलाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
तो प्रीत मेरी इठलाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
उम्मीद की किरण बंध जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
प्रेम की ज्योति जगमगाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
गुलशन मेरी प्रीत सजाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
वही मेरी जीवन साथी है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
‘अजनबी’ की उम्र बीत जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
किशन से राधा मिलने आ जाती है !!
तो मुझको यूँ खूब सताती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
तो दिल को बड़ा तड़पाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
आँसुओं से आँखें भीग जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
नैनों से नींद उड़ जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
चाहत मेरी आँसू बहाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
साथ देती तुम्हारी पाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
मेरी छलनी हो जाती छाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
यादें ही दिलको बहलाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
तमन्नाएं नई जग जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
ख़ामोशी मेरी गीत गाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
वफा ही राहत दिलाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
तो प्रीत मेरी इठलाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
उम्मीद की किरण बंध जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
प्रेम की ज्योति जगमगाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
गुलशन मेरी प्रीत सजाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
वही मेरी जीवन साथी है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
‘अजनबी’ की उम्र बीत जाती है !!
जब याद तुम्हारी आती है !
किशन से राधा मिलने आ जाती है !!
10. निगाहें !
स्वप्निल निगाहें तुम्हारी
दे रही जन्म लाखों अरमानों को !
शम्मा-ए-महफिल हो तुम
समेट लो इन परवानों को !!
दे रही जन्म लाखों अरमानों को !
शम्मा-ए-महफिल हो तुम
समेट लो इन परवानों को !!
09. तेरी बाहों में !
देखूँ तस्वीर डाले निगाहें निगाहों में !
शर्म से सिमट जाऊँ मैं तेरी बाहों में !!
नजर न लगे मेरे पिया को कभी !
बिठाये रखूँ सदा पलकों की छाँव में !!
मौसम है सुहाना और रात चाँदनी !
चलो सैर कर आवें झील से नाव में !!
चाहत की खुशबू से सजाकर मेरे !
बिखेर दूँ ये फूल से दिल तेरी राहों में !!
इस कदर क्या देख रहे हो मुझको !
आओ खो जावें जुल्फों की काली घटाओं मैं !!
साजन बिन कैसे सजाऊँ ‘अजनबी’ !
अरमानों के इन्द्रधनुष हवाओं में !!
तुम्हें पाकर यूँ मैं बहक-सी गयी हूँ !
महकी महकी मस्त इन फिजाओं में !!
शर्म से सिमट जाऊँ मैं तेरी बाहों में !!
नजर न लगे मेरे पिया को कभी !
बिठाये रखूँ सदा पलकों की छाँव में !!
मौसम है सुहाना और रात चाँदनी !
चलो सैर कर आवें झील से नाव में !!
चाहत की खुशबू से सजाकर मेरे !
बिखेर दूँ ये फूल से दिल तेरी राहों में !!
इस कदर क्या देख रहे हो मुझको !
आओ खो जावें जुल्फों की काली घटाओं मैं !!
साजन बिन कैसे सजाऊँ ‘अजनबी’ !
अरमानों के इन्द्रधनुष हवाओं में !!
तुम्हें पाकर यूँ मैं बहक-सी गयी हूँ !
महकी महकी मस्त इन फिजाओं में !!
08. दीवाना मिल गया !
एक हसीना को जहाँ में दीवाना मिल गया !
बुझती शम्मा को मानों परवाना मिला गया !!
मायूस जिसकी जिन्दगी जो कल तलक !
जीने का उसे आज अच्छा बहाना मिल गया !!
आँखें थी उदास बहुत दिल था खोया-खोया !
गुजरती जवानी को यूँ अफसाना मिल गया !!
सपने सजे दिल में तमन्नाएं हुई जवां !
सूने दिल को प्यार का आशियाँ मिल गया !!
दिल की कली खिली महका प्यार का बगिया !
मौसम जिन्दगी को भी सुहाना मिल गया !!
आजाद पँछी एक कैद हुआ आसमान का !
पिंजड़ें में प्यार का उसे तहखाना मिल गया !!
कारवाँ न था न ही राहे मंजिल का पता था !
‘अजनबी’ राही को एक अंजाना मिल गया !!
इस कदर चाहा एक दुजे को उन दोनों ने !
देख के उनका प्यार सारा जमाना हिल गया !!
बुझती शम्मा को मानों परवाना मिला गया !!
मायूस जिसकी जिन्दगी जो कल तलक !
जीने का उसे आज अच्छा बहाना मिल गया !!
आँखें थी उदास बहुत दिल था खोया-खोया !
गुजरती जवानी को यूँ अफसाना मिल गया !!
सपने सजे दिल में तमन्नाएं हुई जवां !
सूने दिल को प्यार का आशियाँ मिल गया !!
दिल की कली खिली महका प्यार का बगिया !
मौसम जिन्दगी को भी सुहाना मिल गया !!
आजाद पँछी एक कैद हुआ आसमान का !
पिंजड़ें में प्यार का उसे तहखाना मिल गया !!
कारवाँ न था न ही राहे मंजिल का पता था !
‘अजनबी’ राही को एक अंजाना मिल गया !!
इस कदर चाहा एक दुजे को उन दोनों ने !
देख के उनका प्यार सारा जमाना हिल गया !!
07. जिन्दगी सुहानी होती !
काश , ऐ खुदा ! वो दीवानी होती !
सच, ये जिन्दगी कितनी सुहानी होती !!
उन्हें लेकर बुनता मैं लाखों ख्वाब !
जैसे वो मेरे सपनों की रानी होती !!
उनके दीदार को तरसती आँखे!
झलक उनकी मेहेरबानी होती !!
दिल के आइने में जो देखते दोनों !
प्यार की तस्वीर कितनी नूरानी होती !!
बेशुमार करता मैं उनसे प्यार !
लाजवाब अपनी जिन्दगी होती !!
राधा किशन की जहाँ में ‘अजनबी ’ !
बेमिशाल अपनी प्रेम कहानी होती !!
सच, ये जिन्दगी कितनी सुहानी होती !!
उन्हें लेकर बुनता मैं लाखों ख्वाब !
जैसे वो मेरे सपनों की रानी होती !!
उनके दीदार को तरसती आँखे!
झलक उनकी मेहेरबानी होती !!
दिल के आइने में जो देखते दोनों !
प्यार की तस्वीर कितनी नूरानी होती !!
बेशुमार करता मैं उनसे प्यार !
लाजवाब अपनी जिन्दगी होती !!
राधा किशन की जहाँ में ‘अजनबी ’ !
बेमिशाल अपनी प्रेम कहानी होती !!
06..संगीत लिखे आओ !
प्रिया पिया मिलकर इक नई प्रीत लिखें आओ !
यौवन के कोरे तन पर नवगीत लिखें आओ !!
प्रेम के झंकार से हो झंकृत तन-वीणा-तार !
नई थीरकन से थीरक उठे चित्त लिखें आओ !!
प्रेम पीयूष रस धोल बोल आज राज खोल !
गुनगुना उठे होंठे ऐसा संगीत लिखें आओ !!
यादो के झंरोखो से मैं ने देखी है इक झलक !
पलकी यादे पलक में हो पुलकित लिखें आओ !!
आज समाज के बंघन से हो मुक्त गगन में !
विचरें विहंग-से उन्मुक्त नई रीत लिखें आओ !!
पीने की चाहत में नैनो से और भी प्यासे हो चले!
प्यास बुझे प्यार की और हो कैसे जीत लिखें आओ !!
कल तक थे दो ‘अजनबी’ आज परिचित हो गये !
कहानी प्यार की ऐसी कल्पनातीत लिखें आओ !!
बार बार आता नही अवसर कभी जीवन में !
कहीं ए घड़ियाँ सुहानी न जाये बीत लिखें आओ !!
मन मंदिर में तो हम बसा चुके हैं एक दुजे को !
प्यार में पुरी तरह होकर समर्पित लिखें आओ !!
ऐसा करें प्यार कि जमाना देखते ही रह जाये !
आँसु व खुन से दास्तान ऐ मेरे मित लिखें आओ !!
साकार करें यूँ सपनों को और बसायें संसार !
प्यार के दुश्मनों से न होकर भयभीत लिखें आओ !!
युगों युगों से अमर है राधा किशन की कहानी !
हमारे प्रेम से हृदय हो उठे द्रवित लिखें आओ !!
यौवन के कोरे तन पर नवगीत लिखें आओ !!
प्रेम के झंकार से हो झंकृत तन-वीणा-तार !
नई थीरकन से थीरक उठे चित्त लिखें आओ !!
प्रेम पीयूष रस धोल बोल आज राज खोल !
गुनगुना उठे होंठे ऐसा संगीत लिखें आओ !!
यादो के झंरोखो से मैं ने देखी है इक झलक !
पलकी यादे पलक में हो पुलकित लिखें आओ !!
आज समाज के बंघन से हो मुक्त गगन में !
विचरें विहंग-से उन्मुक्त नई रीत लिखें आओ !!
पीने की चाहत में नैनो से और भी प्यासे हो चले!
प्यास बुझे प्यार की और हो कैसे जीत लिखें आओ !!
कल तक थे दो ‘अजनबी’ आज परिचित हो गये !
कहानी प्यार की ऐसी कल्पनातीत लिखें आओ !!
बार बार आता नही अवसर कभी जीवन में !
कहीं ए घड़ियाँ सुहानी न जाये बीत लिखें आओ !!
मन मंदिर में तो हम बसा चुके हैं एक दुजे को !
प्यार में पुरी तरह होकर समर्पित लिखें आओ !!
ऐसा करें प्यार कि जमाना देखते ही रह जाये !
आँसु व खुन से दास्तान ऐ मेरे मित लिखें आओ !!
साकार करें यूँ सपनों को और बसायें संसार !
प्यार के दुश्मनों से न होकर भयभीत लिखें आओ !!
युगों युगों से अमर है राधा किशन की कहानी !
हमारे प्रेम से हृदय हो उठे द्रवित लिखें आओ !!
05. मुलाकात
जाने ऐसी क्या बात हुर्इ्र है !
जबसे उनसे मुलाकत हुई है !!
हर पल पल रहे ख्वाब पलक में !
आरजुओ की बरसात हुई है !!
जबसे उनसे मुलाकत हुई है !!
हर पल पल रहे ख्वाब पलक में !
आरजुओ की बरसात हुई है !!
.04...इत्तफाक
कैसी मिली नजरें इत्तेफाक से !
‘वाह’ बोल उठे लब तपाक से !!
घड़कना भूली घडकने दिल की !
हम रह गये ‘अजनबी’’ अबाकसे !!
‘वाह’ बोल उठे लब तपाक से !!
घड़कना भूली घडकने दिल की !
हम रह गये ‘अजनबी’’ अबाकसे !!
03. चाहता हूँ !
चाहत भरी मैं तुमसे ,इक नजर चाहता हूँ!
मेरे प्यार का हो तुम पे ,कुछ असर चाहता हूँ !!
निगाहे मचल रही है , जुबां है बंद मेरी !
कैसे बताऊँ मैं तुमको, किस कदर चाहता हूँ !!
इस भरी दुनिया में , हूँ अकेला मैं कब से चाहता हूँ !
अपनी भी जहाँ में हो ,कोई दिलवर चाहता हूँ !!
मंजिल से बेगाना हूँ ,यूँ राहे जिन्दगी में !
बनाना मैं तुमको अपनी ,हम सफर चाहता हूँ !!
अर्सो से आरजू है ,बस गली की तुम्हारी !
मुहब्बत हो तुम्हारी मुझको ,मयस्सर चाहता हूँ !!
जमाने से डर है न ,अपनो की फिक्र मुझको !
दुनिया से होके मैं यूँ , बेखबर चाहता हूँ !!
खयालो में तुम्हारे यूँ ,खोया-सा रहता हूँ !
सुबहो -शाम रात-दिन ,मैं अक्सर चाहता हूँ !!
ऐ सनम! है कसम मुहब्बत की तुम्हारी !
तुम्हें अपनी जान से भी ,मैं बढ़कर चाहता हूँ !!
चाहत की हद से बढजाऊं ,आज चाहत में !
अपने प्यार को बनाना ,मैं अमर चाहता हूँ !!
चीर के देख लो मेरे दिल को ,लिखा तुम्हारा ही नाम है!!
दिल में होगी चाहत तुम्हारी ,मैं अगर चाहता हूँ !
जमाना कहले कुछ भी ,पर ऐ मेरे सनम !
तुम्हारे साथ मैं जहाँ मैं, बसाना घर चाहता हूँ !!
तुम्हारे चाहत पाने को ,जान से भी खेल जाऊँगा !
करके मैं ऐलान डकेंकी ,चोट पर चाहता हूँ !!
किस्मत की लिखावट को , किसने देखा है ‘अजनबी’ !
अपने बूते पर बदलना ,मैं मुकद्दर चाहता हूँ !!
मेरे प्यार का हो तुम पे ,कुछ असर चाहता हूँ !!
निगाहे मचल रही है , जुबां है बंद मेरी !
कैसे बताऊँ मैं तुमको, किस कदर चाहता हूँ !!
इस भरी दुनिया में , हूँ अकेला मैं कब से चाहता हूँ !
अपनी भी जहाँ में हो ,कोई दिलवर चाहता हूँ !!
मंजिल से बेगाना हूँ ,यूँ राहे जिन्दगी में !
बनाना मैं तुमको अपनी ,हम सफर चाहता हूँ !!
अर्सो से आरजू है ,बस गली की तुम्हारी !
मुहब्बत हो तुम्हारी मुझको ,मयस्सर चाहता हूँ !!
जमाने से डर है न ,अपनो की फिक्र मुझको !
दुनिया से होके मैं यूँ , बेखबर चाहता हूँ !!
खयालो में तुम्हारे यूँ ,खोया-सा रहता हूँ !
सुबहो -शाम रात-दिन ,मैं अक्सर चाहता हूँ !!
ऐ सनम! है कसम मुहब्बत की तुम्हारी !
तुम्हें अपनी जान से भी ,मैं बढ़कर चाहता हूँ !!
चाहत की हद से बढजाऊं ,आज चाहत में !
अपने प्यार को बनाना ,मैं अमर चाहता हूँ !!
चीर के देख लो मेरे दिल को ,लिखा तुम्हारा ही नाम है!!
दिल में होगी चाहत तुम्हारी ,मैं अगर चाहता हूँ !
जमाना कहले कुछ भी ,पर ऐ मेरे सनम !
तुम्हारे साथ मैं जहाँ मैं, बसाना घर चाहता हूँ !!
तुम्हारे चाहत पाने को ,जान से भी खेल जाऊँगा !
करके मैं ऐलान डकेंकी ,चोट पर चाहता हूँ !!
किस्मत की लिखावट को , किसने देखा है ‘अजनबी’ !
अपने बूते पर बदलना ,मैं मुकद्दर चाहता हूँ !!
02.खयाल अजनबी !
उम्र उनकी है उन्नीस साल अजनबी !
उम्र अपनी है इक्कीस साल अजनबी !!
जब से उनसे मेरी हुई मुलाकात है !
बार बार आता उनका खयाल अजनबी !!
जी तो चाहता रंग दूँ उन्हें प्यार के रंग में !
हाथों में लेकर रंग-गुलाल अजनबी !!
रूक-रूक के आती उनकी अदाओं की याद !
क्या गजल की मतवाली चाल अजनबी !!
दिल बहलता मेरा यूँ निगाहें मिलाकर !
आँखें है करती आँखों से सवाल अजनबी !!
कोई घूर के देखे उन्हें तो नोचलूँ आँखें !
है यहाँ किसकी ऐसी मजाल अजनबी !!
तस्सली होगी हमें कभी अपने प्यार पर !
कुछ तो दिखायें आओ हम कमाल अजनबी !!
अपने प्यार को देख कभी कहेगा ये यहाँ !
‘राधाकिशन ’ की जोडी थी मिसाल अजनबी !!
हमें मालूम है अच्छी तरह कुछ दुश्मन !
बुन रहे यूँ खिलाफ हमारे जाल अजनबी !!
प्यार कभी झुकता नहीं किसी ताकत के आगे !
कर नही सकता कोई बांका बात अजनबी !!
दिल की बात उतारूँ कैसे कागज पर !
कैसे लिखूँ ख़त में दिल का हाल अजनबी !!
इजहारे प्यार में डरता हूँ जाने क्यों !
अरमान न हो जाये मेरे हलाल अजनबी !!
बडे घर की बडी खुबसूरत बेटी है वो !
डर है गुस्से में न हो जाये वो लाल अजनबी !!
कहते है लोग जो सोंचू होते वे घोचू है !
लड़के को ही करना होता बहाल अजनबी !!
दुनिया होगी हसी प्यार के सहारे जीने से !
जिन्दगी होगी और भी खुशहाल अजनबी !!
नाम उनका ‘राधा’ है मेरा तो ‘किशन’ है ही !
राहे प्यार में चले ले के मशाल अजनबी !!
अपने प्यार का इजहार मैं कर ही डालूँ !
हाथों में लेकर गुलाब लाल अजनबी !!
उनके हाथों में दे दूँ एक प्यार भरा खत !
साथ में सुन्दर रौशनी रूमाल अजनबी !!
उम्र अपनी है इक्कीस साल अजनबी !!
जब से उनसे मेरी हुई मुलाकात है !
बार बार आता उनका खयाल अजनबी !!
जी तो चाहता रंग दूँ उन्हें प्यार के रंग में !
हाथों में लेकर रंग-गुलाल अजनबी !!
रूक-रूक के आती उनकी अदाओं की याद !
क्या गजल की मतवाली चाल अजनबी !!
दिल बहलता मेरा यूँ निगाहें मिलाकर !
आँखें है करती आँखों से सवाल अजनबी !!
कोई घूर के देखे उन्हें तो नोचलूँ आँखें !
है यहाँ किसकी ऐसी मजाल अजनबी !!
तस्सली होगी हमें कभी अपने प्यार पर !
कुछ तो दिखायें आओ हम कमाल अजनबी !!
अपने प्यार को देख कभी कहेगा ये यहाँ !
‘राधाकिशन ’ की जोडी थी मिसाल अजनबी !!
हमें मालूम है अच्छी तरह कुछ दुश्मन !
बुन रहे यूँ खिलाफ हमारे जाल अजनबी !!
प्यार कभी झुकता नहीं किसी ताकत के आगे !
कर नही सकता कोई बांका बात अजनबी !!
दिल की बात उतारूँ कैसे कागज पर !
कैसे लिखूँ ख़त में दिल का हाल अजनबी !!
इजहारे प्यार में डरता हूँ जाने क्यों !
अरमान न हो जाये मेरे हलाल अजनबी !!
बडे घर की बडी खुबसूरत बेटी है वो !
डर है गुस्से में न हो जाये वो लाल अजनबी !!
कहते है लोग जो सोंचू होते वे घोचू है !
लड़के को ही करना होता बहाल अजनबी !!
दुनिया होगी हसी प्यार के सहारे जीने से !
जिन्दगी होगी और भी खुशहाल अजनबी !!
नाम उनका ‘राधा’ है मेरा तो ‘किशन’ है ही !
राहे प्यार में चले ले के मशाल अजनबी !!
अपने प्यार का इजहार मैं कर ही डालूँ !
हाथों में लेकर गुलाब लाल अजनबी !!
उनके हाथों में दे दूँ एक प्यार भरा खत !
साथ में सुन्दर रौशनी रूमाल अजनबी !!
01.मुलाकात हो तुम
पूनम की चाँदनी रात हो तुम !
सितारों से सजी बारात हो तुम !!
फूलों से नाजूक बदन तुम्हारे !
सुन्दरता की वो सौगात हो तुम !!
देखते ही दिल में तूफान आ जाये !
कयामत की झंझावात हो तुम !!
जुल्फें हैं तुम्हारी या काली घटायें !
दिन को भी कर जाती रात हो तुम !!
झील-सी नील आँखों में दिखा रही !
इन्द्रधनुष कि रंग सात हो तुम !!
सुर्ख होंठों की मुस्कानों से बिखेरती !
’नार दानों के मोति से दांत हो तुम !!
किस आशिक पर बिजली गिराने !
हुई धरती पर तैनात हो तुम !!
अपनी चंचल शोख अदाओं से !
दिखा रही जलवा-करामात हो तुम !!
अल्फाज नहीं पास काबिले तारीफ !
माशाल्लाह ! नूरानी जमात हो तुम !!
चातक से खड़े हैं दीवाने देखो !
स्वाति बूँदों की बरसात हो तुम !!
मानता हूँ इसे मैं खुशकिस्मती !
इस कदर जो मेरे साथ हो तुम !!
जी तो चाहता जी भरके बातें करूँ !
मिश्री से भी मीठी वो बात हो तुम !!
गजल-सी लगती बाँतें तुम्हारी !
बातों की ऐसी जजबात हो तुम !!
सोच रहा मेरा ये दीवाना दिल !
किस जिन्दगी की हयात हो तुम !!
मै हूँ एक प्यासी-कलम हसीना !
रंगीन स्याही की दवात हो तुम !!
कैसे भूलूँगा मैं तुम्हें ‘अजनबी’ !
जिन्दगी की वो हसी मुलाकात हो तुम !!
भूला न सकूँगा ताजिंदगी तुम्हें !
जिन्दगी की ऐसी हसीं लम्हात हो तुम !!
कैसे करूँ बयां जुबान लड़खड़ाये !
दिल की ऐसी नाजुक नग्मात हो तुम !!
फूलों से नाजूक बदन तुम्हारे !
सुन्दरता की वो सौगात हो तुम !!
देखते ही दिल में तूफान आ जाये !
कयामत की झंझावात हो तुम !!
जुल्फें हैं तुम्हारी या काली घटायें !
दिन को भी कर जाती रात हो तुम !!
झील-सी नील आँखों में दिखा रही !
इन्द्रधनुष कि रंग सात हो तुम !!
सुर्ख होंठों की मुस्कानों से बिखेरती !
’नार दानों के मोति से दांत हो तुम !!
किस आशिक पर बिजली गिराने !
हुई धरती पर तैनात हो तुम !!
अपनी चंचल शोख अदाओं से !
दिखा रही जलवा-करामात हो तुम !!
अल्फाज नहीं पास काबिले तारीफ !
माशाल्लाह ! नूरानी जमात हो तुम !!
चातक से खड़े हैं दीवाने देखो !
स्वाति बूँदों की बरसात हो तुम !!
मानता हूँ इसे मैं खुशकिस्मती !
इस कदर जो मेरे साथ हो तुम !!
जी तो चाहता जी भरके बातें करूँ !
मिश्री से भी मीठी वो बात हो तुम !!
गजल-सी लगती बाँतें तुम्हारी !
बातों की ऐसी जजबात हो तुम !!
सोच रहा मेरा ये दीवाना दिल !
किस जिन्दगी की हयात हो तुम !!
मै हूँ एक प्यासी-कलम हसीना !
रंगीन स्याही की दवात हो तुम !!
कैसे भूलूँगा मैं तुम्हें ‘अजनबी’ !
जिन्दगी की वो हसी मुलाकात हो तुम !!
भूला न सकूँगा ताजिंदगी तुम्हें !
जिन्दगी की ऐसी हसीं लम्हात हो तुम !!
कैसे करूँ बयां जुबान लड़खड़ाये !
दिल की ऐसी नाजुक नग्मात हो तुम !!
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