चाहत भरी मैं तुमसे ,इक नजर चाहता हूँ!
मेरे प्यार का हो तुम पे ,कुछ असर चाहता हूँ !!
निगाहे मचल रही है , जुबां है बंद मेरी !
कैसे बताऊँ मैं तुमको, किस कदर चाहता हूँ !!
इस भरी दुनिया में , हूँ अकेला मैं कब से चाहता हूँ !
अपनी भी जहाँ में हो ,कोई दिलवर चाहता हूँ !!
मंजिल से बेगाना हूँ ,यूँ राहे जिन्दगी में !
बनाना मैं तुमको अपनी ,हम सफर चाहता हूँ !!
अर्सो से आरजू है ,बस गली की तुम्हारी !
मुहब्बत हो तुम्हारी मुझको ,मयस्सर चाहता हूँ !!
जमाने से डर है न ,अपनो की फिक्र मुझको !
दुनिया से होके मैं यूँ , बेखबर चाहता हूँ !!
खयालो में तुम्हारे यूँ ,खोया-सा रहता हूँ !
सुबहो -शाम रात-दिन ,मैं अक्सर चाहता हूँ !!
ऐ सनम! है कसम मुहब्बत की तुम्हारी !
तुम्हें अपनी जान से भी ,मैं बढ़कर चाहता हूँ !!
चाहत की हद से बढजाऊं ,आज चाहत में !
अपने प्यार को बनाना ,मैं अमर चाहता हूँ !!
चीर के देख लो मेरे दिल को ,लिखा तुम्हारा ही नाम है!!
दिल में होगी चाहत तुम्हारी ,मैं अगर चाहता हूँ !
जमाना कहले कुछ भी ,पर ऐ मेरे सनम !
तुम्हारे साथ मैं जहाँ मैं, बसाना घर चाहता हूँ !!
तुम्हारे चाहत पाने को ,जान से भी खेल जाऊँगा !
करके मैं ऐलान डकेंकी ,चोट पर चाहता हूँ !!
किस्मत की लिखावट को , किसने देखा है ‘अजनबी’ !
अपने बूते पर बदलना ,मैं मुकद्दर चाहता हूँ !!
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