एक हसीना को जहाँ में दीवाना मिल गया !
बुझती शम्मा को मानों परवाना मिला गया !!
मायूस जिसकी जिन्दगी जो कल तलक !
जीने का उसे आज अच्छा बहाना मिल गया !!
आँखें थी उदास बहुत दिल था खोया-खोया !
गुजरती जवानी को यूँ अफसाना मिल गया !!
सपने सजे दिल में तमन्नाएं हुई जवां !
सूने दिल को प्यार का आशियाँ मिल गया !!
दिल की कली खिली महका प्यार का बगिया !
मौसम जिन्दगी को भी सुहाना मिल गया !!
आजाद पँछी एक कैद हुआ आसमान का !
पिंजड़ें में प्यार का उसे तहखाना मिल गया !!
कारवाँ न था न ही राहे मंजिल का पता था !
‘अजनबी’ राही को एक अंजाना मिल गया !!
इस कदर चाहा एक दुजे को उन दोनों ने !
देख के उनका प्यार सारा जमाना हिल गया !!
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