Wednesday, June 16, 2010

36.ख्वाब की तरह !

महकते थे कभी हम भी गुलाब की तरह !
सीनातान अकड़ते थे किसी नवाब की तरह !!
सब की नजरों में कल बन बैठे थे सवाल !
पेश आए है आज हम यूँ जवाब की तरह !!
दो-दिलो में बंद पडी थी अपनी प्रेम कहानी !
फड़फड़ा रही जो आज यूँ किताब की तरह !!
उम्र का इसे तकाजा कहे या दिल का कुसुर !
प्यार का छाया नशा जिस्म में शराब की तरह !!
दिल की अरमान बह न जाये आँसू बनके !
संजाये हैं जिसे पलको में ख्वाब की तरह !!
जब से बना जमाना दुश्मन अपने प्यार का !
तब से जल रहे दो -दिल तेजाब की तरह !!
दिल से ये दिल की लगी है यारों नही दिल्लगी !
उमड़ पड़ा है प्यार जो कफ-ए -सैलार की तरह !!

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