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Saturday, June 12, 2010
.04...इत्तफाक
कैसी मिली नजरें इत्तेफाक से !
‘वाह’ बोल उठे लब तपाक से !!
घड़कना भूली घडकने दिल की !
हम रह गये ‘अजनबी’’ अबाकसे !!
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