सितारों से सजी बारात हो तुम !!
फूलों से नाजूक बदन तुम्हारे !
सुन्दरता की वो सौगात हो तुम !!
देखते ही दिल में तूफान आ जाये !
कयामत की झंझावात हो तुम !!
जुल्फें हैं तुम्हारी या काली घटायें !
दिन को भी कर जाती रात हो तुम !!
झील-सी नील आँखों में दिखा रही !
इन्द्रधनुष कि रंग सात हो तुम !!
सुर्ख होंठों की मुस्कानों से बिखेरती !
’नार दानों के मोति से दांत हो तुम !!
किस आशिक पर बिजली गिराने !
हुई धरती पर तैनात हो तुम !!
अपनी चंचल शोख अदाओं से !
दिखा रही जलवा-करामात हो तुम !!
अल्फाज नहीं पास काबिले तारीफ !
माशाल्लाह ! नूरानी जमात हो तुम !!
चातक से खड़े हैं दीवाने देखो !
स्वाति बूँदों की बरसात हो तुम !!
मानता हूँ इसे मैं खुशकिस्मती !
इस कदर जो मेरे साथ हो तुम !!
जी तो चाहता जी भरके बातें करूँ !
मिश्री से भी मीठी वो बात हो तुम !!
गजल-सी लगती बाँतें तुम्हारी !
बातों की ऐसी जजबात हो तुम !!
सोच रहा मेरा ये दीवाना दिल !
किस जिन्दगी की हयात हो तुम !!
मै हूँ एक प्यासी-कलम हसीना !
रंगीन स्याही की दवात हो तुम !!
कैसे भूलूँगा मैं तुम्हें ‘अजनबी’ !
जिन्दगी की वो हसी मुलाकात हो तुम !!
भूला न सकूँगा ताजिंदगी तुम्हें !
जिन्दगी की ऐसी हसीं लम्हात हो तुम !!
कैसे करूँ बयां जुबान लड़खड़ाये !
दिल की ऐसी नाजुक नग्मात हो तुम !!
फूलों से नाजूक बदन तुम्हारे !
सुन्दरता की वो सौगात हो तुम !!
देखते ही दिल में तूफान आ जाये !
कयामत की झंझावात हो तुम !!
जुल्फें हैं तुम्हारी या काली घटायें !
दिन को भी कर जाती रात हो तुम !!
झील-सी नील आँखों में दिखा रही !
इन्द्रधनुष कि रंग सात हो तुम !!
सुर्ख होंठों की मुस्कानों से बिखेरती !
’नार दानों के मोति से दांत हो तुम !!
किस आशिक पर बिजली गिराने !
हुई धरती पर तैनात हो तुम !!
अपनी चंचल शोख अदाओं से !
दिखा रही जलवा-करामात हो तुम !!
अल्फाज नहीं पास काबिले तारीफ !
माशाल्लाह ! नूरानी जमात हो तुम !!
चातक से खड़े हैं दीवाने देखो !
स्वाति बूँदों की बरसात हो तुम !!
मानता हूँ इसे मैं खुशकिस्मती !
इस कदर जो मेरे साथ हो तुम !!
जी तो चाहता जी भरके बातें करूँ !
मिश्री से भी मीठी वो बात हो तुम !!
गजल-सी लगती बाँतें तुम्हारी !
बातों की ऐसी जजबात हो तुम !!
सोच रहा मेरा ये दीवाना दिल !
किस जिन्दगी की हयात हो तुम !!
मै हूँ एक प्यासी-कलम हसीना !
रंगीन स्याही की दवात हो तुम !!
कैसे भूलूँगा मैं तुम्हें ‘अजनबी’ !
जिन्दगी की वो हसी मुलाकात हो तुम !!
भूला न सकूँगा ताजिंदगी तुम्हें !
जिन्दगी की ऐसी हसीं लम्हात हो तुम !!
कैसे करूँ बयां जुबान लड़खड़ाये !
दिल की ऐसी नाजुक नग्मात हो तुम !!
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