गुलदस्ता
Pages
कागजी प्यार
बोलती तस्वीरें
अनूदित कथाएं
कवितायेँ
बाल साहित्य
हाइकु
अन्य
क्षणिकाएँ
Saturday, June 12, 2010
16. ऐतवार !
ऐतवार
की सरहद को हम
लांघ चुके हैं शायद !
तभी तो पानी में परछाई देख कहते
वो आ रहा चाँद हमसे मिलने !!
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment