Saturday, June 12, 2010

33.गुलाब चाहिए !

कैसे कहूँ अपने मुँह से ‘‘जनाब चाहिए’’ !
नहीं नहीं हड्डी नही सिर्फ कबाब चाहिए !!
जीवन में मुझे मिले काँटे बहुत है !
अब मुझे एक गुलाब चाहिये !!
आँखों से आँसू मैने बहाये बहुत है !
निगाहों को अब हसीं ख्वाब चाहिये !!
उनसे तो किये मै ने कोई सवाल !
सभी सवालो का एक जवाब चाहिये !!
यूँ तो पढ़ने को करता मेरा मन !
सघ प्रकाशित कोई किताब चाहिये !!
भूलाने वास्ते मुझे दिल के गमों को !
ज्यादा नहीं बस दो-बुँद शराब चाहिये !!
जिसे पाकर संवर जाये मेरी जिन्दगानी !
ऐसी इक हमसफर लाजवाब चाहिये !!

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