क्षणिकाएँ

"बाप ने बेटे के
अरमानो को रखा है
सहेजकर,
मोटी सी रकम
मिल सकती है
चूँकि
दहेज पर......"


"जब जब मेरे मित्र
कहते हैं कि
वो देखो,प्रकृति में
'बसंत' आ रहा है
तब तब मुझको
ऐसा लगता है कि
प्रकृति में अब तो
बस.....'अंत' आ रहा है....."


"जीवन याने
'जी' धन 'वन'
अर्थात 'जीव' व 'वन',
पर ...अब तो
जीवन से
कट रहा है 'वन'
बाकि है बस 'जी'
'जी हाँ जी'....."