Saturday, June 12, 2010

34.तमन्ना जगी है

जब से मेरा दिल उन में लगी है !
जीने की मन में इक तमन्ना जगी है !!
वो भी तडप रही मैं भी तडप रहा !
दोनों दिल में आग बराबर लगी है !!
मैं ने किया मेरा जीवन उनके नाम !
अब तो वो जाने वफा मेरी जिन्दगी है !!
दिल दिया मैने पहली बार किसी को !
दिल्लगी नहीं यह तो दिल की लगी है !!
कल तक थी जो मेरे लिये ‘अजनबी ’!
आज ऐसा लगता वो मेरी सगी है !!

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