Saturday, June 12, 2010

19.गुलशन हो तुम !

मेरी चाहत का चमन हो तुम !
अरमानों का गुलषन हो तुम !!
मेरी नस-नस में बसे तुम हो !
मेरे दिल की धड़कन हो तुम !!
उपहार देने मुझे जन्मदिन पर !
मेरे लिये लाये कंगना हो तुम !!
तुमने मुझे जब राधा पूकारा !
तो मैंने कहा मेरे किशन हो तुम !!
मैं तुम्हारी दासी तुलसी हूँ पिया !
मेरी लिये तो नील गगन हो तुम !!
आओ बुझा दूँ मैं आज प्यास तुम्हारी !
बरखा हूँ मैं प्यासा-सावन हो तुम !!
खो गई हूँ तुम्हारी मुहब्बत में मैं !
जैसे मेरे प्यार में मगन हो तुम !!
आँखों में तुम्हारी देखूँ तस्वीर मेरी !
‘अजनबी’ ज्यों मेरा दर्पण हो तुम !!

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