Saturday, June 12, 2010

06..संगीत लिखे आओ !

प्रिया पिया मिलकर इक नई प्रीत लिखें आओ !
यौवन के कोरे तन पर नवगीत लिखें आओ !!
प्रेम के झंकार से हो झंकृत तन-वीणा-तार !
नई थीरकन से थीरक उठे चित्त लिखें आओ !!
प्रेम पीयूष रस धोल बोल आज राज खोल !
गुनगुना उठे होंठे ऐसा संगीत लिखें आओ !!
यादो के झंरोखो से मैं ने देखी है इक झलक !
पलकी यादे पलक में हो पुलकित लिखें आओ !!
आज समाज के बंघन से हो मुक्त गगन में !
विचरें विहंग-से उन्मुक्त नई रीत लिखें आओ !!
पीने की चाहत में नैनो से और भी प्यासे हो चले!
प्यास बुझे प्यार की और हो कैसे जीत लिखें आओ !!
कल तक थे दोअजनबीआज परिचित हो गये !
कहानी प्यार की ऐसी कल्पनातीत लिखें आओ !!
बार बार आता नही अवसर कभी जीवन में !
कहीं घड़ियाँ सुहानी जाये बीत लिखें आओ !!
मन मंदिर में तो हम बसा चुके हैं एक दुजे को !
प्यार में पुरी तरह होकर समर्पित लिखें आओ !!
ऐसा करें प्यार कि जमाना देखते ही रह जाये !
आँसु खुन से दास्तान मेरे मित लिखें आओ !!
साकार करें यूँ सपनों को और बसायें संसार !
प्यार के दुश्मनों से होकर भयभीत लिखें आओ !!
युगों युगों से अमर है राधा किशन की कहानी !
हमारे प्रेम से हृदय हो उठे द्रवित लिखें आओ !!

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