Saturday, June 12, 2010

09. तेरी बाहों में !

देखूँ तस्वीर डाले निगाहें निगाहों में !
शर्म से सिमट जाऊँ मैं तेरी बाहों में !!
नजर न लगे मेरे पिया को कभी !
बिठाये रखूँ सदा पलकों की छाँव में !!
मौसम है सुहाना और रात चाँदनी !
चलो सैर कर आवें झील से नाव में !!
चाहत की खुशबू से सजाकर मेरे !
बिखेर दूँ ये फूल से दिल तेरी राहों में !!
इस कदर क्या देख रहे हो मुझको !
आओ खो जावें जुल्फों की काली घटाओं मैं !!
साजन बिन कैसे सजाऊँ ‘अजनबी’ !
अरमानों के इन्द्रधनुष हवाओं में !!
तुम्हें पाकर यूँ मैं बहक-सी गयी हूँ !
महकी महकी मस्त इन फिजाओं में !!

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