Saturday, June 12, 2010

12.आजकल !

यूँ उभर आई है हमारी खुशियाँ आजकल !
कि दब गई अपनी सारी खामियाँ आजकल !!
दिल बाग.बाग हुआ जा रहा प्यार में तुम्हारे !
यूं घर कर गई मन में खुशियाँ आजकल !!
कल तलक तो बेहद उदास थे ये दो नैन !
हसीन ख्वाबें देख रही वही अँखियाँ आजकल !!
सुब्हो.शाम रात.दिन बस तुम्हारा ही ख्याल !
डूबी यादों की चाशनी में खामोशियाँ आजकल !!
चाहत की खुशबू से यूं महका मन बगिया !
आशाओं की उड़ने लगी तितलियाँ आजकल !!
वर्षो से चाहत थी किसी की चाहत की दिल में !
किस्मत की हुई है मेहेरबानियाँ आजकल !!
चले हैं दो.दीवाने लेकर प्यार भरे दो.दिल !
प्यार का बनाने जहाँ में आशियां आजकल !!
प्यार के समन्दर को पार लगाने की खातिर !
ढील दी है हमने दिल की कश्तियाँ आजकल !!
है बेकरार दिल तुमसे मिलने को बेताब !
इस कदर बढ़ गई है बेखुदियाँ आजकल !!
गुनगुनाने लगे है होंठ जब से प्रेम गीत !
लेने लगी है जवानी अंगड़ाईयाँ आजकल !!
मुझे प्यार से सता रहे मेरे साथी सहचर !
तुम्हें भी तो चीढ़ा रही होंगी सखियाँ आजकल !!
गली.गली डगर.डगर बस हमारी चर्चा !
अपने प्यार की टंग गई तख्तियाँ आजकल !!
आँखें मेरी फड़क रही दिल भी तो मचल रहा !
रूक रूक के आने लगी हिचकियाँ आजकल !!
खनक रही है चुड़ियाँ पायल भी बज रहे !
कानों में यूँ गुंज रही शहनाईयाँ आजकल !!
लेखनी यूँ मचल रही हाशिये भी कम पड़े !
प्यार के रंग में रंग गई चिट्ठियाँ आजकल !!
लाल.गुलाब से सुन्दर चेहरे से तुम्हारे यूँ !
झर रही है मुस्कानों की पंखुड़ियाँ आजकल !!
जुल्फों की काली घटाओं में छिपा चाँद.सा मुखड़ा !
नजरों की चमक रही बिजलीयाँ आजकल !!
तुम्हारी यादों की सुनहरी झील में तो देखो !
आरजुओं की तैरती है मछलियाँ आजकल !!
डरते नहीं हैं हम जमाने से पर क्या करें !
दोनों की है कुछ.कुछ मजबूरियाँ आजकल !!
इतना ना तड़पाओ मुझे ऐ मेरी जाने वफा !
आँखों से अश्क के बह रहे मोतियाँ आजकल !!
कैसे बतायें हम दिल की बात तुम्हीं बताओ !
आँसुओं से लिख रहे है कहानियाँ आजकल !!
चाहत भरे दो-दिल की नीव पर ‘अजनबी’ !
बस रही है देखो प्यार की बस्तियाँ आजकल !!
यादों का है छाया मौसम दिलो दिमाग में ऐसा !
बार बार याद दिलाती यूँ निशानियाँ आजकल !!
मनमंदिर में मेरे जब से आ बसी हो तुम !
जीवन्त-सी लगती है तुम्हारी मूर्त्तियाँ आजकल !!
भूख लगती है न प्यास हमें तुम्हारे प्यार में !
इस कदर मन में छाई मस्तियाँ आजकल !!
प्रीत, की डोरी से बंध जब उड़ा मन-पतंग !
बौनी लगती आस्मां की ऊँचाईयाँ आजकल !!
प्यार की राहों में चलते-चलते हासिल !
हो रही यूँ नई नई अनुभूतियाँ आजकल !!
प्यार के रंग में रंग गए ‘राधा’ और ‘किशन ’ !
सखियाँ भी तो मना रही होलियाँ आजकल !!
शर्म के गुलाल से लाल हो रहे हैं दोनों गाल !
निगाहों की चल रही है पिचकारियाँ आजकल !!
आँखों से आँसू बहा समुन्दर बनाकर हम !
नाप रहे हैं प्यार की गहराईयाँ आजकल !!
तुम्हारे आने से बंजर में भी बहार आ गई !
बिन तुम्हारे सूनी लगती गलियाँ आजकल !!
होनें लगे है हम पूरे कॉलेज में यूँ बदनाम !
घूर घूर के देखते लड़के-लड़कियाँ आजकल !!
गुस्से का पारा मेरा आस्मां छू जाता जाने क्यों !
तुम्हें देख के जब कोई बजाता सीटियाँ आजकल !!
अपने प्यार का दुश्मन क्यों हुआ सारा जमाना !
आते जाते कस रहे सब फब्तियाँ आजकल !!

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