Saturday, June 12, 2010

30.कश्मीर में सनम !

क्या लिखा है रबने हमारी तकदीर में सनम !
क्या-क्या लिखा है हमारे हाथों की लकीर में सनम !!
लैला-मजनू, शीरी-फरहाद, रोमियो-जुलियेट !
क्या नाम हमारे भी जुड़ेंगे रांझा व हीर में सनम !!
प्यार के रंग में तो रंग चुके है कब से दोनों !
आओ रंग जायें होली के रंग-अबीर में सनम !!
हमारे मिलने से देखो कैसे आई बहार फिजां में !
काश , इस वक्त होते दोनों कश्मीर में सनम !!
वो देखो अमराई में कब से कूक रही कोयल !
महक रहा महुआ मलयज समीर में समन !!
बड़ी फूर्सत से बनाया है ऊपर वाले ने तुम्हें !
कितनी खूब सूरत लग रही हो तस्वीर में सनम !!
स्वप्निल निगाहें तुम्हारी लगती झील-सी मुझको !
बांधलो मुझे रेशमी जुल्फों की जंजीर में सनम !!
तुम्हारी मांग आज मैं अपने खून से भर दूँगा !
चलो तुम्हें ले चलूँ देवी माँ के मंदिर में सनम !!
क्या मेरे संग तुम रह लोगी रूखी-सूखी खाकर !
जिन्दगी तुम्हारी तो बीती है पालक-पनीर खाकर !!
सच्चा प्यार तो होता हमेशा दिल से कहते लोग !
क्या रखा है पैसों के गरीब व अमीर में सनम !!
माना कि हमारे पास नहीं राजमहल का सुख !
प्यार हो तो मिलता चैन पर्ण-कुटीर में सनम !!
आओ प्यार करके दिखा दें दुनिया को हम दोनों !
क्या रखा है आखिर इस नश्वर शरीर में सनम !!
मेरे दिल में तुम होगी और तुम्हारे दिल में मैं !
प्रीत-अनुराग-अभिलाषा होगी पीर में सनम !!
याद है तुम्हें वो हसीं पल जब हुआ घायल मैं !
प्यार का छुपा था पैगाम नजरों के तीर में सनम !!
खून से लिखूँगा मैं अपनी मोहब्बत की दास्तांन !
ऐतबार है मुझे यूँ अपने जमीर में सनम !!
तुम्हें लेकर ही बुने सपने सजाया गुलिस्तां है !
देखे ख्वाब हैं हमेशा ख्वाबों की ताबीर में सनम !!
तुम्हारे गमों के आँसुओं को मैं पी लूँगा ‘अजनबी’ !
देखो कितना है दर्द छिपा आँखों के नीर में सनम !!
अपनी भावनाओं को तो शब्दों में पिरोऊँगा ही मैं !
शामिल नहीं हूँ शायर ‘गालिब-मीर’ में सनम !!

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