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Wednesday, July 7, 2010
38.तबाही देखिये !
प्यार की राह में भटका इक राही देखियें !
प्यार के नाम पर हुई कैसी तबाही देखियें !!
बह रहे आँखों से
अश्क
व जिगर से खून !
कलम की नीब से बनके कैसे स्याही
देखियें!!
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