तुम्हारे बिना जीना कितना मुश्किल हो चला है !
जीवन मेरा अब तो और बोझिल हो चला है !!
चाहत की राहों में कभी मैं निकला अकेला था !
कारवां बन गम तुम्हारा यूँ शामिल हो चला है !!
तुम्हारी यादों में आज भी मैं रोता अकेले ही हूँ !
नयन अब तो आँसुओं की झील हो चला है !!
तेरा दिया हुआ प्यार का तोहफा भी आजकल !
जाने क्यों मेरी मुहब्बत का कातिल हो चला है !!
तेरी यादों में खोना और बहाते रहना आँसू !
आलम-ए-जुदाई की कैसी मंजिल हो चला है !!
तेरा दिया हुआ जख्म दिल में घाव बन गया !
टीस भरा वो दिल का दर्द अब साहिल हो चला है !!
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