Wednesday, July 7, 2010

47.मै तो हूँ उपवास आज !

लिख रहा हूँ आँसूओं से अपना इतिहास आज !

तुम नहीं बस तुम्हारी यादें हैं मेरे पास आज !!

काबिल तो न था फिर क्यों लगा चाहने तुमको !

हो रहा मुझे अपनी औकात का एहसास आज !!

दासी बनके उदासी है छाई चेहरे पर देखो !

मैं तो हूँ ये मेरे नैन भी हैं कितने उदास आज !!

भूखा हूँ कब से तेरे झूठे प्यार का ऐ जाने वफा !

तेरी यादों के दिये जलाकर मैं तो हूँ उपवास आज !!

दिल की दहलीज पर तुम्हारी देख रही राह !

आँखें बिछाये अरमानों की मेरी जिन्दा लाश आज !!

नाम लेते सुकूं से समाजाता मौत के आगोश में !

प्यास चाहत की बुझा देती ‘गर तुम काश आज !!

तड़प रहा है दिल मेरा यूँ तुमसे होके जुदा !

इन निगाहों को भी है जिसै तुम्हारी तलाश आज !!

तुम बेवफा नही मेरी किस्मत है मुझ से खफा !

छोड़ ‘अजनबी’ जब खुद पे रहा नहीं विश्वास आज !!


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