लिख रहा हूँ आँसूओं से अपना इतिहास आज !
तुम नहीं बस तुम्हारी यादें हैं मेरे पास आज !!
काबिल तो न था फिर क्यों लगा चाहने तुमको !
हो रहा मुझे अपनी औकात का एहसास आज !!
दासी बनके उदासी है छाई चेहरे पर देखो !
मैं तो हूँ ये मेरे नैन भी हैं कितने उदास आज !!
भूखा हूँ कब से तेरे झूठे प्यार का ऐ जाने वफा !
तेरी यादों के दिये जलाकर मैं तो हूँ उपवास आज !!
दिल की दहलीज पर तुम्हारी देख रही राह !
आँखें बिछाये अरमानों की मेरी जिन्दा लाश आज !!
नाम लेते सुकूं से समाजाता मौत के आगोश में !
प्यास चाहत की बुझा देती ‘गर तुम काश आज !!
तड़प रहा है दिल मेरा यूँ तुमसे होके जुदा !
इन निगाहों को भी है जिसै तुम्हारी तलाश आज !!
तुम बेवफा नही मेरी किस्मत है मुझ से खफा !
छोड़ ‘अजनबी’ जब खुद पे रहा नहीं विश्वास आज !!
No comments:
Post a Comment