बसने से पहले ही घर मेरा उजड़ गया !
समय कुछ ऐसा मंत्र कानो में यूँ पढ़ गया !!
मुड़कर देखा नही मैं ने कभी मुहब्बत में !
बस राहे प्यार मे यूँ आगे ही आगे बढ़ गया !!
आँसूओं से भीगोये मैंने दिल के हर पन्ने !
प्यास बुझाने चाहत की दिल घड़ा घड़ गया !!
काँटो के जंगल में किया यूँ सफर रोते रोते !
लांधा सागर गहरा ऊँचे पहाड़ चढ़ गया !!
आँखे खुली तो टुटा आज मेरे प्यार का भरम !
काँटा था या काँच का टुकडा जो पाँव में गड़ गया !!
मेरे अरमानों का लगा मुरझाने गुलदस्ता !
पीले पत्ते की तरह सपना मेरा झड़ गया !!
एक हवा का झोंका था या बुरे समय की आँघी !
मुद्दत से लगाया प्यार का पौघा उखड़ गया !!
मेरे दिल की अंगूठी तो खाली थी कल तलक !
नाम उनका नगींना बन दिल मे यूँ जड़ गया !!
प्यार नहीं मिला था किसी का फिर भी मैं खुश था !
आज मिला प्यार तो लगा किससे पाला पड़ गया !!
बहुत मनाया मैंने इस दिल को पर न माना !
जाने ऐसी क्या बात थी जो जीद में यूँ अड़ गया !!
आँखे बरस पड़ी मेरी यकायक ‘अजनबी ’ !
दर्द का बादल आँसू बन जब उमड़ गया !!
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