मेरी जिन्दगी के हर पन्ने पर तेरा नाम है !
और गली गली आज मेरा प्यार बदनाम है !!
तेरा प्यार ही तो मेरे जीने का एक सहारा था !
मंजिल न मिली तो मेरा प्यार यूँ गुमनाम है !!
कितने अरमानों से हमने रखा कदम था !
चाहत के जहाँ का मगर क्या हुआ अंजाम है !!
तेरी चाहत की रोशनी से कभी हुई सुबह !
जुदाई के अंधेरे में अब तो हो रही शाम है !!
मैने कभी किसी को न धोखा दिया न रुसवा किया !
धोखेबाजी का फिर भी मुझ पर क्यों इल्जाम है !!
किसने किया मुझको यूँ बर्बाद किस तरह !
मेरी बर्बादी का मेरे पास सुबूत तमाम है !!
तेरी यादों के सहारे जी लूँगा चंद अर्सा और !
तू न सही मगर पास ये कलम व कलाम है !!
खुश रहो आबाद रहो फूलो फलो जाने वफा !
‘अजनबी ’ के प्यार का यही आखरी पैगाम है !!
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