Thursday, July 8, 2010

92.रोती थी तू !

मेरी सीने में सिर रखकर कभी रोती थी तू !
रात भर खयालो में खोकर नही सोती थी तू !!
तेरे प्यार में में पागल हुआ कोई शक नही !
दिल मुझे देके प्यार में पागल-सी होती थी तू !!
मुझे देख खिल उठता तेरा चाँद-सा चेहरा !
आँखों में आँखें डालकर सपने संजोती थी तू !!
तेरे एक झलक पाने को दिल रहता है बेताब !
खत में इस कदर चाहत के बीज बोती थी तू !!
उम्मीद की किरण बनकर आई जिन्दगी में !
मेरे अंघेरे जीवन की मानो इक ज्योती थी तू !!
तेरे सपनो का मैं कभी होता राजकुमार था !
मेरे ख्यालो में ज्यों सपनो की रानी होती थी तू !!
कितनी हसीन लगते थे वो पल वो लम्हे !
मेरे सीने में सिर रखकर जब सोती थी तू !!
देवी माँ चरणों में जाते सिर झुकाने !
जोड़ी सलामत रहने की मांगती मनौति थी तू !!
अपनी सहेलियों को अपना दुखड़ा सुनाकर !
कॉलेज में सिसक-सिसक पलके भीगोती थी तू !!
रईस खानदान से तेरा ताल्लुक था हमेशा !
अमीर बाप की लाडली बेटी इकलौती थी तू !!
तेरा दादा ही था जिसने हमें मिलने न दिया !
दीवार बनके अड़ गया जिसकी पोती थी तू !!
तुझे खोकर मैं तड़प रहा हूँ आज भी !
राहें प्यार में मुझे मिले अनमोल मोति थी तू !!
प्यार करने वाले तो डरते नही है किसी से !
प्यार करके भी प्यार में क्यो करती कटौती थी तू !!
तू न मिली गम नही तेरा प्यार मिला क्या कम है !
‘अजनबी’ के लिये जैसे मानो इक चुनौति थी तू !!
तेरे दिये गुलाबो को मैं रखता सहेज कर !
मेरे दिये हुए गुलाबों को जूड़े में पिरोती थी तू !!
आज भी याद है मुझको वो पल अच्छी तरह !
मुझसे मिलने बाते करने बावरी सी होती थी तू !!
प्यार के सागर में पतवार खो जुड़ा हो गये !
अपने आँसूओं की झील में कभी डुबोती थी तू !!
जाने अंजाने में गर भूल हुयी हो तुझ से तो !
आँखों से यूँ अश्क बहा उस चूक को धोती थी तू !!

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