Wednesday, July 7, 2010

53.चाँदनी कर दी !

हमने तो उनके नाम अपनी जिन्दगी कर दी !

अर्सा एक या दो नही पूरी की पूरी सदी कर दी !!

अमा की अंघेरी रात में जुगनू बन जिये हम !

नाम उनके पूनम की रात और चाँदनी कर दी !!

जीवन के सफर में हमें जो कुछ भी मिले थे !

गम लिये हम जिन्दगी में उनकी ख़ुशी भर दी !!

राहें प्यार में जाहिर है फूल भी मिलेंगे काँटे भी !

काँटे हम्ही ने बाँटे उनके हिस्से हरियाली कर दी !!

काँटे की राहों पर चलते रहे पर आह न की !

जब हिम्मत ही न थी उनमे तो क्यो हामी भर दी !!

रंगीन सपने बहार फिजां महफिल दिये उन्हें !

अश्के गम दर्दे दिल से हमने दोस्ती कर ली !!

उनकी यादों मे अपना दिल जला कर हमने !

पी गये अंघियारे उनके हिस्से रौशनी कर दी !!

मेरी मुहब्बत पे उन्हें भरोसा नही था शायद !

इसीलिए किसी दुसरे से उन्होने शादी कर ली !!

ऐसी क्या वजह थी जो उनकी जुबां खुल न सकी !

जब घरवालो ने उनकी और से सगाई कर दी !!

अपने अरमानो का गला घोटा हमने प्यार में !

आरजुओं ने तमन्नाओं ने भी ख़ुदकुशी कर ली !!

तरस खाके लोगो ने पुछा ये क्या किया ‘अजनबी ’!

दिल जलाकर उनकी जिन्दगी दीवाली कर दी !!


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