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Wednesday, July 7, 2010
39.फूल !
फूलों की चाह में हमने गले काँटों को लगाया !
आँखें खुलीं तो सपनों को लहूलूहान पाया !!
हमें क्या पता कभी शुल बन चूभेगें दिल को !
जिनकी राहों में हमने कभी गुलाब बिछाया !!
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