Thursday, July 8, 2010

78.जीवन में रक्खा क्या है !

संग हीन जीवन में रक्खा क्या है !
उमंग हीन मन में रक्खा क्या है !!
फुल खिलते है न बसते पँछी !
यूँ उजड़े चमन में रक्खा क्या है !!
तुलसी होती है न रंगोली जहाँ !
ऐसे सूने आंगन में रक्खा क्या है !!
सुगंध है न सुन्दर दिखने में !
रंगहीन सुमन में रक्खा क्या है !!
नींद है न सपने आँसू अरमां !
यूँ उदास नयन में रक्खा क्या है !!
बदली है न वर्षा स्वाति बिजली !
ऐसे प्यासे-सावन में रक्खा क्या है !!
अनुराग है न प्रेम प्रीत अभिलाषा !
ऐसे रूठे साजन में रक्खा क्या है !!
बंशी बजती है न ‘राधा किशन’ !
यूँ सूने मधुवन में रक्खा क्या है !!
अब तक न बनी जो प्रेम कहानी !
ऐसे शुष्क यौवन में रक्खा क्या है !!
मृत्यू को दे दो आमंत्रण ‘अजनबी’!
यूँ निरस जीवन में रक्खा क्या है !!

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