उनपे निसार मेरी जवानी तो हुई !
उन्हें पाकर जिन्दगी सुहानी तो हुई !!
उनके मिलने से यूँ एक फसाना बना !
दो-लफाजों की इक कहानी तो हुई !!
प्यार में कभी मैं उनका दीवाना हुआ !
मेरी मुहब्बत में वो भी दीवानी तो हुई !!
उन्हें रानी बनाने का देखा ख्वाब था !
चलो वो किसी के सपनो की रानी तो हुई !!
दिल लगाने में मैने यूँ की थी नादानी !
इश्क करने की उनसे नादानी तो हुई !!
उन्हें पाने की तमन्ना में ऐ ‘अजनबी ’ !
बर्बाद मेरी सारी जिन्दगानी तो हुई !!
प्रेमग्रंथ में जुडे़ ‘राधा-किशन’ के नाम !
खुदा की हमपे मेहेरबानी तो हुई !!
पल भर सही दोनों का दिल तो बहला !
अपने प्यार की तस्वीर नूरानी तो हुई !!
राजमहल का सुख मैं कहाँ दे पाता !
लिहाजा वो और की पटरानी तो हुई !!
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