चाहा था हमने भी कभी किसी को दिलोजां से !
अपनाया था दिल से जो प्यारा था दो-जहाँ से !!
बहार बनकर आए वो मेरी जिन्दगी में !
कोई और नहीं वो मेरे दिल के मेहमां थे !!
भाग्य ने जब दिया साथ राहें मुहब्बत में !
वो वक्त वो लम्हे भी हम पे यूँ मेहरबां थे !!
चाहत की खुशबू थी फैली चमने दिल में !
आरजू थी किसी की दिल में कुछ अरमां थे !!
तलाश-ए-मंजिल में निकल पड़े दो-दिल !
राहें प्यार में आगे पिछे न कोई कारवाँ थे !!
प्यार भरी जिन्दगी की जुस्तजू रही दिल में !
मुद्दत से सहेजे हुए अनोखे आशियाँ थे !!
कोई गम न था प्यार में ‘गर मर भी जाते !
दो जिस्म सही मगर हम दोनों एक जां थे !!
खुने दिल से लिक्खे हमने खत ‘अजनबी !
जब मासूम था प्यार हमारा और ये दिल नादां थे !!
आ रही याद हमें बीती कहानियाँ प्यार की !
सागर से गहरा था हमारा प्यार ऊँचे आस्मा से !!
अफसोस है कि आज हम दोनों एक साथ नही !
कहर ढाके वक्त ने हमसे लिये इम्तहां थे !!
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