पिछले जनम के किन कुकर्मो का मुझे फल मिला !
पहली बार में ही मुहब्बत में जुठा पत्तल मिला !!
उन्होंने नही भाग्य ने किया है मुझसे विश्वासघात !
अमृत से लग रहे प्यार में आखिर गरल मिला !!
मुद्दत से सहेजकर रक्खा था मैंने इस दिल को !
पहली मर्तबा जब उन्हें दिया तो भी घायल मिला !!
बड़ी हसरत से मैं तो उन्हें लिखता था यूँ प्रेम पत्र !
जिसका जवाब इतनी बेरूखी से मुझे कल मिला !!
इक तमन्ना थी मेरी भी चाहत के कुछ सपने थे !
जीवन के इस क्षेत्र में मैं क्यों ऐसे असफल मिला !!
यह तो मेरी बदकिश्मती है उनका भला क्या दोष !
प्यार के नाम पर उनका लिखा खत केवल मिला !!
कंचन समझकर उन्हें मैं तो हो गया था मोहित !
कसौटी पर जब परखा सोने को तो पीतल मिला !!
चाँद सितारों से सजाने की सोचा था जिस दामन को !
किसी और की यादों में भीगा उनका आँचल मिला !!
प्यार के रंग में रंगना चाहा मेरी ये कोरी जिन्दगी !
सिन्दूरी की डिबिया उठाई तो उसमें काजल मिला !!
प्यास चाहत की मेरी अबतक यूँ अधूरी ही रही !
बहुत ढूँढ़ा पर कही न मुझे निर्मल जल मिला !!
मैने पूछा अपने आप से यूँ आँसू क्यों बहा रहा हूँ !
दिल को तलाशा तो देखा दर्द का छाया बादल मिला !!
कोशिश तो बहुत की मैंने मगर भुला न सका हूँ !
उनका दिया हुआ प्यार भरा दर्द हर पल मिला !!
मैंने किया है फैसला यूँ आज से दिल न दूँगा कभी !
जब भी दिया दर्द मिला अश्के गम मिले छल मिला !!
चाहा तो हमने बगिया में प्यार के फूल ही फूल हो !
क्या करे जो तकदीर में लिखा काँटो का जंगल मिला !!
वफा के बदले वफा मिले और संवरे जिन्दगी !
सोचा यही पर आँसू से भीगे गीतो गजल मिला !!
मेरी कुटिया उजड़ी इस बात का गम नही मुझको !
मैं तो यूँ खुश हूँ बहुत कि उन्हें राजमहल मिला !!
आँसूओं की ठहरी हुई इस जीवन रूपी झील में !
जब भी मैं ढूँढ़ा उनकी यादों का खिला कवँल मिला !!
कितना गहरा था उनसे मेरा प्यार अजनबी !
जो नाम लेते ही उनका, मेरा नयन सजल मिला !!
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