Thursday, July 8, 2010

68.तेरी तलाश में !

निकल पड़ी है निगाहें जाने क्यूँ तेरी तलाश में !
मिलजाये कहीं तू शायद मुझको इसी आस में !!
वर्षो से हम प्यासे थे और आज भी हम प्यासे है !
जाने कितने वर्ष बीत गये यादों के उपवास में !!
सावन की काली छाई घटा है नील अम्बर पर !
ढूँढने चला हूँ तुम्हें बिजली के श्वेत प्रकाश में !!
आवाज दो मुझको तुम प्रिया अकेला हूँ मैं आज !
जाने छिपी हो कहाँ धरती-पाताल या आकाश में !!
फिसल पड़े हैं चढ़ते चढ़ते उम्र की सीढ़ियाँ !
आ गये हम यूँ ही दोनों सुर्खियों के उपहास में !!
अरमान अधूरे ‘अजनबी’ तमन्नाएँ है बाकी !
क्या लौट अतीत हम चलें शब्दों के इतिहास में !!
होने लगी है खत्म उम्र की रोशनी अब शायद !
सीने से लगा लेता काश तुम होती मेरे पास में !!
जुदाई की अँधेरी रात में तन्हाई ही तन्हाई है !
दिल में बसा है प्यार तुम्हारा तुम बसी मेरी साँस में !!
तुमसे बिछुड़ कर हम कैसे तड़प रहे हैं देखों !
मोती-से चमके हैं मेरे आँसू यादों की धरी धास में !!
छलक-से आते अश्क मेरी आँखों से यकायक !
आती है याद तुम्हारी जब प्यार के एहसास में !!

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