Wednesday, July 7, 2010

59. बगावत करूँ बता !

तेरी बेवफाई की किससे शिकायत करूँ बता !
तुझे छोड़ अब मैं किससे मुहब्बत करूँ बता !!
तुझे दिल अपना दिया तो घायल हुआ हूँ ऐसे !
दिल देने किसी और को कैसे हिम्मत करूँ बता !!
दिल के मंदिर में तुझे बिठा पूजा की मैंने तेरी !
किस मुंह से किसी और का इबादत करूँ बता !!
याद आते ही तेरी छलक रहे हैं यूँ आँसू मेरे !
इन आँसुओं की भला कैसे हिफाजत करूँ बता !!
तेरा साथ होता तो जमाने को भी झूका सकता था !
तुझसे जुदा होके मैं किससे बगावत करूँ बता !!
तेरी चाहत ने ‘अजनबी ’को दी ऐसी सीख है !
तुझे चाहकर किस की और चाहत करूँ बता !!
बेखुदी में दिल खोकर तुझसे ये हादसा हुआ !
फिर किसी को क्यूं दिल देने की उल्फत करूँ बता !!

No comments:

Post a Comment