Thursday, July 8, 2010

81.सपने सजाये थे !

हमने भी कभी इन आँखो में सपने सजाये थे !
जिन्दगी में अपनी जब वो पहली बार आये थे !!
देख उन्हें घड़का था यह बेताब दिल अपना !
पहले प्यार का पहला पैगाम जब वो लाए वे !!
गुजारे थे वक्त कभी आहे भर भर सपने में !
प्यार के उस आलम में बस वो ही वो समाये थे !!
आहट से कभी-कभी रूक-सी जाती थी घड़कने !
इक झलक के लिये हमें वो इतना तरसाये थे !!
दर्द में भी छलक पड़ते थे आँसू खूशी के यूँ ही !
जब हाथों में हमने उनके नाम गुदवाये थे !!
गुनगुना नही सकते हम आज इस कदर !
प्यार के जिस गीत को हम दो मिलकर गाये थे !!
आज भी आती है उनकी याद यूँ आती रहेगी !
सच प्यार में हमने कितने आँसू बहाये थे !!
काश वो आ जाती मेरी सूनी जिन्दगी में फिर से !
जन्मदिन के मौके पर ज्यो तोहफा लेकर आए थे !!
किससे कहें हम दिल की बात आज ‘अजनबी ’!
वो नही है जिन्हें कभी अपने किस्से सुनाये थे !!

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