Wednesday, July 7, 2010

55.उजडे़ प्यार का मंजर !

उजड़े प्यार का मेरा यूँ मंजर देखिये !

किसने चलाया दिल पे खंजर देखिये !!

कल तक उगी हरी घास थी चाहत की !

कैसे हुआ आज ये दिल बंजर देखिये !!

यादो में किसी की यूँ रोते रोते ‘अजनबी ’ !

ढिली पड़ी मेरी ये अस्थी पंजर देखिये !!

बहाते बहाते आँसू धंस गई अँखियाँ !

प्यार ने किया कैसा जादू मंतर देखिये !!

सपने अरमान ख्वाब बिखर गये मेरे !

लहूलूहान ये दिल के अंदर देखिये !!

उनकी आँखों से छलकते आँसू ख़ुशी के !

आँसू आँसू में है कितना अंतर देखिये !!

कहते हैं लोग इश्क आग का दरिया है !

मैंने बनाए अश्क समंदर देखिये !!


No comments:

Post a Comment