Thursday, July 8, 2010

66.यादों की खरोंच से !

प्यार मेरे जब कचरे हो गये !
तेरे गम दिलके पहरे हो गये !!
तेरी यादों की खरोंच से यूँ आज !
जख्म पुराने मेरे हरे हो गये !!
तैरने लगे आँखों में फिर से अरमां !
समन्दरे अश्क और गहरे हो गये !!
मुकद्दर का यह कैसा फैसला देखो !
कल के खोटे सिक्के आज खरे हो गये !!
दर्दे दिल लिये की हुआ दर दर !
खुदा दूर दरबान सब बहरे हो गये !!
तकदीर की जमीं पर चाहत हसरत आरजू !
अरमान सारे शतरंजी मोहरे हो गये !!
कश्मे वादे वफा प्यारे दिल दिल्लगी !
मेरी समझ से सब परे हो गये !!
लूटना नहीं चाहा वो लूट गया खुद !
लूटने वाले फिर से हरे भरे हो गये !!
प्यार से चूने थे मैंने जो मोंगरे !
उनके जूड़े में वो गजरे हो गये !!
वफा पाने की चाहत में ‘अजनबी’ !
देंखो भविष्य में कैसे अंधेरे हो गये !!

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