Thursday, July 8, 2010

98.दावत में !

हम तो लूट गये सौ-फिसदी किसी की चाहत में अजनबी !
पता नहीं वो कहाँ है कैसी है किस हालत में अजनबी !!
उनसे मिले इक मुद्दत हुई तरस रहे हम दीदार को !
काश हो जाती मुलाकात कहीं किसी की दावत में अजनबी !!

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