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Thursday, July 8, 2010
96.संजो सकूँ !
कहाँ है ऐसी गोद जहां सिर रख मैं सो सकूँ !
वो हो जाये मेरी ही सदा मैं उसी का हो सकूँ !!
काश मिल जाती मुझको कहीं ऐसी एक आंख !
जिसमें आँखे डाल मैं यूँ सपने संजो सकूँ !!
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