Thursday, July 8, 2010

69.दिली इरादा था !

तेरे साथ जिन्दगी बीताने का मेरा इरादा था !
साथ जियेंगे साथ मरेंगे ये अपना वादा था !!
पर किश्मत को मंजूर न था फैसला अपना !
लगता है हमारे दिल में प्यार कुछ ज्यादा था !!
कितनी हसीन लगने लगी थी जिन्दगी अपनी !
वर्ना तेरे बगैर ये जीवन कितना सादा था !!
पैगाम-ए-मुहब्बत लेकर जब तू आई थी !
तुझ पे निसार होने दिल हमेशा आमाद था !!
प्यार से पुकारती थी कभी तू मुझको किशन !
मैंने भी तो तेरा नाम प्यार से रखा ‘राधा’ था !!
याद दिलाती यादें तेरी क्यों मुझको बार-बार !
राहें प्यार में अपना ये दिल कितना नादां था !!
ता उम्र निभाऊँगा प्यार तुझसे ये दावा है !
अफसोस है कि निभा न सका जो किया वादा था !!
उजड़ गया प्यार का आशियाँ मेरा ‘अजनबी’ !
प्यार की बस्ती बसाने का जबकि दिली इरादा था !!

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