वो भी एक अजब जमाना था अजनबी !
मैं भी कभी किसी का दीवाना था अजनबी !!
उन्हें देखा तो जिन्दगी से प्यार होने लगा !
इससे पहले मैं बेगाना था अजनबी !!
तीरे नजर उनकी चूभ गये दिलमें !
क्या गजब का उनका निशाना था अजनबी !!
जी रहे थे हम तो यूँ चाहत के सहारे !
जीने का एक अच्छा बहाना था अजनबी !!
ख्वाबों में करते रहे सफर रातदिन !
प्यार का वो सफर सुहाना था अजनबी !!
जी भर के लूटाया प्यार हमने उन पर !
दिल तो प्यार का तहखाना था अजनबी !!
अपने आँसूओं से सीचे जो प्यार के पौधे !
क्या उसे ऐसे बिखर जाना था अजनबी !!
उजड़ गया प्यार का यूँ आशियाँ अपना !
क्या करूँ धोखे से मैं अंजाना था अजनबी !!
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