बिन प्रियतमा मेरी जिन्दगी अधूरी !
शौक नहीं जीने का पर है मजबूरी !!
यादें वफा व वादों के दिल पर !
वक्त ने चलाई है आज तेज धूरी !!
दिली ख्वाहिश वो तमन्नाएँ आरजू !
दिल की जमीं पर मेरी हुई न पूरी !!
गलतफहमियाँ क्या गुल खिला दी !
बढ़ती गयी दिल से दिल की दूरी !!
सफाई देने शिकवा-ए-बेवफाई की !
मुझे उनसे मिलना है सख्त जरूरी !!
बाहों में बाहें निगाहों में वो सचपूछो !
हसीन लगती थी कितनी शाम सिन्दूरी !!
तलाश रही है उन्हें कबसे निगाहें !
छिपी हैं दिल में वो मानों जैसे कस्तुरी !!
जब जब भी आता उनकी यादों का झोंका !
पीता हूँ मैं यूँ आँसू भर भर अँजुरी !!
मिला था मुझको एक प्यार भरा दिल !
किस्मत ने नहीं दी मिलने की मंजुरी !!
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