Thursday, July 8, 2010

89.गवाही देखना !

जिन्दगी की राहों में कभी तुम ‘अजनबी’ राही देखना !
किसी की चाहत में कैसे हुई मेरी तबाही देखना !!
खून से लिखे खत से उन्हे ऐतबार न हुआ !
अश्क ही देगें मेरे प्यार की एक गवाही देखना !!
जिसकी यादों में लिख रहा हुँ मैं गजल आँसूओ में !
रंग लाएगी कभी तो मेरे आँसूओं की स्याही देखना !!
दिल से जिसे कभी अपनाया था मैनें उसे पा न सका !
रह जायेगी मेरी जवानी यूँ कवांरी बिन ब्याही देखना !!
जिनकी यादों को समेट कर मैं लिख रहा हूँ कविता !
आँसूओं से भर जायेगी ‘गुलदस्ता’ की सूराही देखना !!
युग युग तक याद सब लोग करेंगे ‘राघा किशन’ को !
हरेक होठों पे होगी हमारी कहानी ऐ मेरे माही देखना!!

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