Thursday, July 8, 2010

72.तू न मिली मुझको !

सारी दुनिया मिली मुझको !
बस एक तू न मिली मुझको !!
जिन्दगी के सफर में तू ही !
एक बेवफा मिली मुझको !!
जां से ज्यादा चाहा मैने तुझे !
और तू खफा मिली मुझको !!
तूझको चाहा क्या बुरा किया !
जिसकी सजा मिली मुझको !!
चाहत मिली न प्यार तेरा !
न तेरी वफा मिली मुझको !!
तू ने दिया ऐसा जख्म जिसकी !
न कहीं दवा मिली मुझको !!
यारी की हसरत न रही !
ऐसी तू यारां मिली मुझको !!
घुट रहा दम आज मेरा !
कहीं न हवा मिली मुझको !!
यादें तेरी यूँ आती हमेशा !
ऐसी इक प्रिया मिली मुझको !!
जला परवाना ‘अजनबी ’!
ज्यों इक शम्मा मिली मुझको !!

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