काश तुम होती आज मेरी बाहों में !
तस्वीरें देखता तुम्हारी निगाहों में !!
जिन्दगी मेरी भी कितनी हसीन होती !
चलता मैं भी मुहब्बत की राहों में !!
अश्क न बहते ऐसे आँखों से मेरे !
दर्द न पलता प्यार की पनाहों में !!
मेरी मुहब्बत जो कभी रंग लाती !
कराहें छिपी न होती इन आहों में !!
बीते लम्हों की कसक याद दिलाती !
गुजारे हैं जो वक्त किसी की चाहों में !!
चाहत की रूह मेरी भटक रही है !
आज भी देखो यादों की इदगाहों में !!
समन्दरे दिल में उठाते आज भी तूफान !
प्यार के ज्वार समय की सलाहों में !!
मैं तो यूँ खुश हूँ ‘अजनबी’ कि मुझको !
अश्क ही मिले हैं इश्क के गुनाहों में !!
तकदीर ने ही हमें धोखा दिया वर्ना !
हम भी गिने जाते प्यार के शहंशाहों में !!
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