Thursday, July 8, 2010

88.मजबूर है अजनबी !

दिल से दिल दूर है अजनबी !
कितना मजबूर है अजनबी !!
क्या करें कुछ समझ में न आए !
किसको ये मंजुर है अजनबी !!
ढाया है ऐसा सितम आज देखो !
वक्त कितना क्रुर है अजनबी !!
बेरहम बेजिगर बेदर्दी सा !
खुदा भी तो निष्ठुर है अजनबी !!
प्यार का उजड़ना-बिछड़ना तो !
दुनिया दस्तुर है अजनबी !!
बिखर गया गुलिस्तां चाहत का !
हुआ चकना चुर है अजनबी !!
आज भी तो दिल हमारे प्यासे है !
मिलने को आतुर है अजनबी !!
सुखे ख्वाब तो बेजाब हुई आँखे !
खोया अपनी नुर है अजनबी !!
उड़ गया प्यार का रगं यूँ देखो !
जैसे मानो कपूर है अजनबी !!
मस्त थे दिल दोनों प्यार में कल !
आज खोया शुरूर है अजनबी !!
होना था मांग में मेरा पर ये क्या !
किसका ये सिन्दूर है अजनबी !!
‘राधा’ का या ‘किशन का रब जाने !
किसका ये कुसूर है अजनबी !!

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