Thursday, July 8, 2010

65.दिल टूटा हुआ !

उजड़े चमन को फिरसे आज !
आबाद करने में हूँ जूटा हुआ !!
देखता नहीं कोई जाने क्यूं मुझे !
आईना जो हूँ मैं इक टूटा हुआ !!
मुहब्बत है मुझसे कोसों दूर !
इस कदर मुकद्दर रूठा हुआ !!
मुझे लूटने की कोशिश न करो !
मैं तो हूँ पहले से ही लूटा हुआ !!
वक्त का तकाजा था या अनहोनी !
भरी महफिल में मैं झूठा हुआ !!
साहिल है न मेरी मंजिल पास !
अर्से बीत गये साथ छुटा हुआ !!
वक्त के सांचे में ढल रहा हूँ !
प्यार की राहों में था जो घुटा हुआ !!
इजहारे प्यार में सोचता हूँ मैं !
कैसे करूँ पेश दिल टूटा हुआ !!
आँसू से लिखी जो अपनी कहानी !
मेरा फसाना देखो अनुठा हुआ !!

1 comment: