Thursday, July 8, 2010

93.मुबारकबाद अजनबी !

क्यू आ रही है इस कदर उनकी याद अजनबी !
कसक छिपी है आज भी दस साल बाद अजनबी !!
इस जनम में उन्हें पाना ना मुमकिन ये तय है !
फिर भी से दिल क्यों कर रहा फरियाद अजनबी !!
जिन्दगी के किसी मुकाम पर यूँ साथ चले थे !
वक्त ने किया हमें बंधन तोड़ आजाद अजनबी !!
माना कि हम बिछुड़ गये है पर दिल तो है पास !
आँसू बहाके कर तो सकते है आबाद अजनबी !!
दिल के किसी कोने में उनकी आज भी होती है पूजा !
होता है अहसासे प्यार ज्यों ज्यों आरती में खोया ही रहूँ मैं !
दिल तो करता है उनकी यादों में खोया ही रहूँ !
इश्क में अश्क बहा करता रहूँ इजाद अजनबी !!
प्यार का यह सफर भी कितना अजीब है देखिये !
पूरी नही होती कभी भी इसकी जो मियाद अजनबी !!
कैसी सुन्दर आँखे थी उनकी जो फिदा हो गया !
आज भी देता हूँ मैं उन निगाहों को दाद अजनबी!!
उनकी जैसी खूबसूरत लडकी देखी नही कही !
इस धरती पर मैने कभी वर्षो बाद अजनबी !!
जब जब उनकी प्रशंसा में सुनाना चाहा मैंने शेर !
बडे अदब से कहती थी वो इरशाद अजनबी !!
आज जन्मदिन है उनका मना रही होगी खूशियाँ !
काश मैं भी दे पाता उन्हें मुबारकबाद अजनबी !!
दिल में उठते ज्वारों को कैसे अल्फाज दूँ !!
कैसे करूँ मैं दिल की बातों का अनुवाद अजनबी !!
काश मेरी माँ आज जिन्दा होती तो उसे कहती ‘बहू’!
होती कितनी खुश और देती आशीर्वाद अजनबी !!
उनकी जुल्फों साये में हुई चुपके-चुपके बातें !
आते है याद आज मुलाकातों के संवाद अजनबी !!
उनकी गोद में सिर रख जब जब सुना दुखड़ा !
चखा है आँखों से टपके आँसुओं का स्वाद अजनबी !!
मुहब्बत की यूँ झुठी दास्तान में मैं क्या से क्या हो गया !
कभी कभी सोचता प्यार है एक उन्माद अजनबी !!
मुकद्दर बनाने वाले को जब तरस ही न आई !
तो मैं आज यहाँ किससे करूँ प्रतिवाद अजनबी !!
वक्त से बड़ा ताकतवर कोई होता ही नही यहाँ !
वक्त बनता मलहम कभी कभी जल्लाद अजनबी !!

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