आज भी मेरे दिल में तेरी चाहत है जाने क्यों !
कल तक जो थी आज भी अव्याहत है जाने क्यों !!
तेरे इन गेसुओं के साये में ‘अजनबी’ मेरे !
बेचैन दिलको यूँ मिलती राहत है जाने क्यों !!
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