Wednesday, July 7, 2010

44.जाने क्यों !

आज भी मेरे दिल में तेरी चाहत है जाने क्यों !

कल तक जो थी आज भी अव्याहत है जाने क्यों !!

तेरे इन गेसुओं के साये में ‘अजनबी’ मेरे !

बेचैन दिलको यूँ मिलती राहत है जाने क्यों !!


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