Thursday, July 8, 2010

61. तेरी यादों में खोया हूँ !

आज भी तेरी प्यार में खोया हूँ देख !
बिखरे ख्वाबों को यूं संजोया हूँ देख !!
तुझसे जुदा हो के भी इस दिल में !
तेरी चाहत का बीज बोया हूँ देख !!
तरस तरस के बरसें हैं नैन !
तेरी यादों में कितना रोया हूँ देख !!
गोद है तेरी न गुलाब का बिस्तर !
कांटों की सेज में सोया हूँ देख !!
तुने जो निशानी में दिया रूमाल था !
आँसू से कैसे उसे भीगोया हूँ देख !!
मिल के बाटें होते दुःख दर्द दोनों !
जिस बोझ को अकेले ढोया हूँ देख !!
इश्क के जुर्म में मुझे अश्क ही मिले !
आँसू से गुनाहों को मैं धोया हूँ देख !!
तेरी चाहत की झील में ‘अजनबी ’ !
जीवन नैया मेरी डुबोया हूँ देख !!

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