धोखा जब देना ही था तो मुझको प्यार क्यो किया !
अपनी झूठी मुहब्बत का यूँ इजहार क्यों किया !!
तुम्हारा प्यार न मिलता तो भी मैं जी सकता था !
इस कदर मेरे दिल को बेकरार क्यों किया !!
दिल जब तोड़ना ही था तो पहले ‘ना’ कर देते !
बीच मंझधार में लाके बे-पतवार क्यों किया !!
साथ निभाने जब हिम्मत ही न थी तुम में !
तो अपनी झुठी चाहत का यूँ इकरार क्यों किया !!
दोनों मिलकर जब दिल का बनाया आशियाँ था !
उसे तोड़ किसी और से घर संसार क्यो किया !!
क्या पूछ सकता हूँ मैं तुमसे ऐ जाने वफा !
प्यार करके आखिर शादी से तूने इंकार क्यों किया !!
तस्वीर ही बिगड़ी है तो आईने का क्या कुसूर !
तेरे दिल के आईने में मैने दीदार क्यों किया !!
मरी हालत देख कहते है सारे जमाने के लोग !
ऐसी भोली सूरत पे तुमने ऐतवार क्यों किया !!
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