Thursday, July 8, 2010

70.औकात नहीं भूली !

सब कुछ भूला मैंने अपनी औकात नहीं भूली !
मेरे साथ बीते अतीत की वो बात नहीं भूली !!
भूलने को की मैंने यूँ कोशिश कई बार पर !
भूला नहीं पाया तुझको तेरी जजबात नहीं भूली !!
कैसे बताऊँगा मैं तुझे तू ही बता दे मुझको !
जबकि तेरी दी हुई प्यारी-सी सौगात नहीं भूली !!
तू चाहे भूला दे मुझको मेरे प्यार को जाने वफा !
भूला नहीं तुझे दिन कभी मेरी रात नहीं भूली !!
तेरी मुहब्बत को कैसे भूला सकता हूँ मैं भला !
तेरे प्यार में आई यादों की बारात नहीं भूली !!
आज भी बरस रहे है नैन देख तेरी यादों में !
प्यासी निगाहें यूँ सावन की बरसात नहीं भूली !!
तुझसे मिलना मेरा अजीबो-गरीब इत्तेफाक था !
जिन्दगी में हुई वो पहली मुलाकात नहीं भूली !!
मेरे मासुम दिल पर जो चलाया खंजर तूने !
मेरे साथ जो धोखा हुआ मैने वो घात नहीं भूली !!
समन्दरे दिल में भी मेरे कभी आया था तूफान !
जिन्दगी की करती जो डुबोई झंझावात नहीं भूली !!
शतरंज -ए जीवन में तुमने चली कई चाले !
मगर मैंने कभी राह और मात नही भूली !!

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