मेरे जनाजे में न किसी के आँसू होंगे
न किसी की सिसकियाँ अजनबी !
मेरी लाश को यूँ गुजरते देखेंगी
दुनिया वालों की अँखियाँ अजनबी !!
नामो निशान तो मेरा मिट ही जायेगा
इस दुनिया से हमेशा के लिए !
शेष रह जायेंगी केवल मेरी लिखी
कुछ पाण्डुलिपियाँ अजनबी !!
अच्छा लिखा है
ReplyDeleteअटल सत्य
ReplyDeleteहिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
ReplyDeleteकृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें
इस सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
ReplyDeleteजी धन्यवाद
ReplyDelete