Thursday, July 8, 2010

100.पाण्डुलिपियाँ !



मेरे जनाजे में न किसी के आँसू होंगे
न किसी की सिसकियाँ अजनबी !
मेरी लाश को यूँ गुजरते देखेंगी
दुनिया वालों की अँखियाँ अजनबी !!
नामो निशान तो मेरा मिट ही जायेगा
इस दुनिया से हमेशा के लिए !
शेष रह जायेंगी केवल मेरी लिखी
कुछ पाण्डुलिपियाँ अजनबी !!

5 comments:

  1. अटल सत्य

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  3. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  4. जी धन्यवाद

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