Wednesday, July 7, 2010

4. दर्द !

जिंदगी से उब चला हूँ मैं !

दर्द की पनाहों में पला हूँ मैं !!

आज भी निशान हैं ‘अजनंबी‘ दिल में !

इश्क में इस कदर जला हूँ मैं !!

किसको सुनाऊँ अपना दुखड़ा !

किसको दिखाऊँ दिल का टुकड़ा !!

साथी है न कोई हमदम मेरे !

वक्त भी है मुझसे उखड़ा -उखड़ा !!

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